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मेरा पेट खराब होने वाला है’…’मां का निधन होने वाला है’ छुट्टी के लिए बिहार के शिक्षक दे रहे अजीबोगरीब आवेदन

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acn18.com बांका/बांका जिले में इन दिनों छुट्टी के लिए शिक्षकों के आवेदन चर्चा का विषय बने हुए हैं। आखिर हो भी क्यों न, यहां के शिक्षक एडवांस में मृत्यु व अन्य बीमारियों की आशंका जताकर आक्समिक अवकाश जो मांग रहे हैं। इसकी बानगी देखिए… कटोरिया के एक शिक्षक ने आवेदन दिया है कि शादी में खाना खाकर उनका पेट खराब हो जाएगा। इस कारण उन्हें दो दिनों की छुट्टी दी जाए। इसी तरह धोरैया पीपरा स्कूल के अजय कुमार ने लिखा है कि उनकी मां बीमार है। पांच दिसंबर की रात आठ बजे उनका निधन हो जाएगा। इसलिए छह और सात दिसंबर के लिए आकस्मिक अवकाश स्वीकृत की जाए। शिक्षकों के ऐसे अजीबो-गरीब आवेदन पर शिक्षा विभाग के अधिकारी अपना सिर पीट रहे हैं।

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आवेदन का सिलसिला जारी

छुट्टी के लिए अजीबो-गरीब आवेदन देने का सिलसिला जारी है। बाराहाट के खड़ियारा उर्दू विद्यालय के शिक्षक राज गौरव ने प्रधानाध्यापक को दिए आवेदन में लिखा है कि चार और पांच दिसंबर को वे बीमार रहेंगे। इसके लिए आकस्मिक अवकाश दें। कटोरिया में मवि. जमदाहा के शिक्षक नीरज कुमार ने विद्यालय प्रधान को लिखा है कि वे सात दिसंबर को शादी में भाग लेने जा रहे हैं। इसमें अधिक भोजन करने के बाद पेट खराब होने की आशंका है। इसे ठीक होने में दो दिन का वक्त लगेगा। शिक्षक के आवेदन और प्रशासनिक आदेश इंटरनेट मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।

अधिकारियों का विरोध कर रहे शिक्षक

दरअसल, शिक्षकों के ऐसे आवेदन भागलपुर के आयुक्त दयानिधान पांडेय के उस आदेश के विरोध में आ रहे हैं, जिसमें आकस्मिक अवकाश (सीएल) के लिए तीन दिन पहले स्वीकृति लेना अनिवार्य किया गया है। दो दिन पूर्व मंगलवार को शिक्षा विभाग की बैठक में आयुक्त ने यह आदेश जारी किया था। इसके आलोक में बुधवार को पहले भागलपुर डीईओ और फिर शाम को बांका डीईओ पवन कुमार ने भी ऐसा पत्र जारी कर दिया।

माध्यमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष डा. आशीष कुमार दीपक का कहना है कि अधिकारियों को आकस्मिक अवकाश शब्द की परिभाषा का पता नहीं है। पत्र निकालने वाले ऐसे अधिकारियों की बुद्धि पर तरस आता है। पहले अधिकारी नियम पढ़ लें और आदेश को वापस लें, अन्यथा शिक्षक विरोध में सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।

शिक्षक संघ ने फैसले की निंदा की

प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रधान सचिवघनश्याम प्रसाद यादव ने कहा कि प्रमंडल या जिलास्तर के अधिकारी का काम सरकार के नियमावली का अनुपालन कराना है। पत्र निकालने वाले अधिकारी को नियमावली बनाने का अधिकार किसने दिया है। सीएल के आदेश का मामला मैं पटना तक पहुंचा चुका हूं। शुक्रवार को संघ के साथ शिक्षा अधिकारियों से मिलने पटना जा रहा हूं। संगठन इस आदेश की कड़ी निंदा करता है।

अधिकारियों ने कही ये बात

वहीं, बांका के जिला शिक्षा अधिकारी पवन कुमार का कहना है कि आयुक्त के आदेश पर सीएल के संबंध में पत्र जारी किया गया है। इस पत्र का मतलब शिक्षकों को परेशान करना नहीं है। वे लोग चाहते हैं कि शिक्षकों की छु्ट्टी के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं हो। निरीक्षण के दौरान कई विद्यालयों में एक साथ अधिकतर शिक्षक छुट्टी पर मिले। पढ़ाई बाधित मिली। इसे देखते हुए सीएल को लेकर दिशा-निर्देश जारी किया गया है। जरूरी पड़ने पर किसी का अवकाश रोका नहीं जाएगा। कुछ लोग इस मामले को बेवजह तूल दे रहे हैं।

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