सियासत की विरासत में नए सूरज का उदय
छत्तीसगढ़ की सियासत में ‘महंत’ परिवार का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। स्व. बिसाहू दास महंत से शुरू हुई यह राजनीतिक विरासत अब अपनी तीसरी पीढ़ी की ओर कदम बढ़ा रही है। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और सांसद ज्योत्सना महंत के पुत्र सूरज महंत अब पर्दे के पीछे से निकलकर फ्रंट फुट पर नजर आ रहे हैं। क्या यह छत्तीसगढ़ कांग्रेस के एक नए ‘सूरज’ का उदय है? देखिए हमारी यह विशेष रिपोर्ट।
वीओ 1 । छत्तीसगढ़ की राजनीति में जब भी रसूख, सादगी और कद्दावर नेतृत्व की बात होती है, तो महंत परिवार का जिक्र लाजिमी है। दादा बिसाहू दास महंत की साख, पिता चरणदास महंत की सियासी धमक और मां ज्योत्सना महंत की कर्मठता को समेटे अब एक नया चेहरा जनता के बीच अपनी पहचान बना रहा है। नाम है— सूरज महंत।
कहने को तो सूरज महंत एक युवा चेहरा हैं, लेकिन सियासत के दांव-पेंच उन्होंने बचपन से ही देखे हैं। अपनी मां ज्योत्सना महंत के दोनों लोकसभा चुनावों में रणनीतिकार की भूमिका निभाने वाले सूरज अब महज एक ‘बेटे’ की पहचान से आगे बढ़कर एक ‘नेता’ के रूप में उभर रहे हैं।
फाइनल विओ। सूरज महंत का कद केवल विरासत तक सीमित नहीं है। वे सक्ती विधानसभा से लेकर कोरबा लोकसभा के सुदूर वनांचलों तक सक्रिय हैं। प्रशासन से सीधे संवाद करना हो या कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करना, सूरज हर मोर्चे पर मुस्तैद दिखते हैं। राजनीति के गलियारों में सवाल है कि क्या 2028 में वे सक्ती की कमान संभालेंगे या फिर कोरबा से दिल्ली की राह पकड़ेंगे? सूरज एमए डिग्रीधारी है अभी वे 30 साल के है।
पिता चरणदास महंत का अनुभव और मां का साथ, सूरज महंत के लिए एक बड़ा लॉन्चपैड तैयार कर चुका है। “अभी तो यह अंगड़ाई है…” जैसे संकेतों के बीच यह साफ है कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की राजनीति में इस ‘सूरज’ की तपिश और चमक दोनों बढ़ने वाली है। विरासत की इस रेस में सूरज महंत ने अपनी दावेदारी मजबूती से पेश कर दी है। अब देखना होगा कि वक्त आने पर पार्टी उन्हें किस मोर्चे पर तैनात करती है।



