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बस्तर गोंचा महापर्व की रथ यात्रा में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, भगवान जगन्नाथ ने दिए भक्तों को दर्शन

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बस्तर। बस्तर की अनूठी परंपरा और आस्था का प्रतीक गोंचा महापर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। पुरी की तर्ज पर आयोजित इस ऐतिहासिक रथ यात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं माता सुभद्रा के दर्शन किए।

रियासत काल से चली आ रही इस परंपरा में बस्तर की अलग पहचान है। मान्यता है कि बस्तर के राजा पुरुषोत्तम देव जब पुरी गए थे, तब उन्हें रथपति की उपाधि मिली थी और वे 16 चक्कों वाले रथ के साथ बस्तर लौटे थे।

गोंचा महापर्व के दौरान चार चक्कों वाले रथ में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा को विराजमान कर नगर भ्रमण कराया जाता है। परंपरा के अनुसार राजा द्वारा रथ के सामने चांदी की झाड़ू से छेरा कर यात्रा की शुरुआत की जाती है।

इस पर्व की सबसे खास परंपरा तुपकी सलामी है। बांस से बनी तुपकी में पेंग के बीज डालकर श्रद्धालु भगवान को सलामी देते हैं और बस्तर की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। तुपकी की गूंज और भक्ति के माहौल के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

गोंचा महापर्व में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु बस्तर पहुंचते हैं। आस्था और परंपरा के इस अनोखे संगम ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया है।

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