सुकमा (ACN 18 News):
जिस हाथ में AK-47 थामकर दुर्गम जंगलों में नक्सल मोर्चे पर डटने का जज्बा होता है, उन्हीं हाथों में जब डांडिया की खनकती छड़ियां नजर आईं, तो नजारा अपने आप में खास बन गया। नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में साहस की पहचान बन चुकीं ‘दुर्गा फाइटर’ की महिला कमांडोज ने इस बार अपनी एक अलग और भावुक कर देने वाली छवि पेश की। वर्दी में कठिन चुनौतियों का सामना करने वाली इन जांबाज जवानों ने गरबा-डांडिया की धुन पर कदम से कदम मिलाकर उत्सव का भरपूर आनंद लिया। यह दृश्य केवल नृत्य और मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिला शक्ति, आत्मविश्वास और खुशियों के साझा अवसर का खूबसूरत प्रतीक बन गया।
पुलिस लाइन में पहली बार 3 दिवसीय गरबा-डांडिया का आयोजन
सुकमा पुलिस लाइन में पहली बार आयोजित इस तीन दिवसीय गरबा-डांडिया कार्यक्रम ने पुलिस परिवारों के बीच नई ऊर्जा और उल्लास का माहौल बना दिया। पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर की विशेष पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में ‘दुर्गा फाइटर’ की महिला कमांडो, महिला पुलिसकर्मियों, शहीद जवानों के परिवारों की महिलाओं और बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। रोजमर्रा की तनावपूर्ण ड्यूटी, घने जंगलों की सुरक्षा और संवेदनशील परिस्थितियों के बीच यह आयोजन जवानों व उनके परिजनों के लिए मानसिक सुकून और मेलजोल का बड़ा जरिया बना।
शहीद परिवारों के साथ जुड़ा आत्मीयता का रिश्ता
इस आयोजन का सबसे भावुक पहलू शहीद जवानों के परिवारों की सहभागिता रही। एक ही प्रांगण में पुलिस परिवार, दुर्गा फाइटर कमांडोज और शहीदों के परिजन जब एक साथ झूमे, तो वहां अपनत्व और सामूहिकता का माहौल जीवंत हो उठा। बच्चों ने भी पारंपरिक वेशभूषा में डांडिया रास में उत्साह दिखाया। बेहतर प्रदर्शन करने वाली प्रतिभागियों और बच्चों को वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
वरिष्ठ अधिकारियों ने बढ़ाया हौसला
कार्यक्रम में सीआरपीएफ के डीआईजी आनंद सिंह, सुकमा कलेक्टर अमित कुमार और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी ने आयोजन को गरिमामयी बनाया। अधिकारियों ने कठिन परिस्थितियों में तैनात महिला जवानों और उपस्थित परिवारों का हौसला बढ़ाया और इस रचनात्मक पहल की सराहना की।
कर्तव्य और संस्कृति का खूबसूरत संतुलन
सुकमा पुलिस लाइन से निकली यह तस्वीर बताती है कि सुरक्षा बलों की जिंदगी सिर्फ बंदूक और बारूद तक सीमित नहीं है। वे अपनी कला, संस्कृति और परंपराओं से भी उतनी ही शिद्दत से जुड़े हैं। AK-47 के साए में मोर्चे पर डटी रहने वाली इन महिला कमांडोज का डांडिया की ताल पर थिरकना यह संदेश देता है कि साहस के साथ संवेदनशीलता और संघर्ष के बीच जीवन के उल्लास को कैसे जिया जाता है।