नोबेल कमेटी के मुताबिक, नवी पिल्लै ने असाधारण साहस और ईमानदारी के साथ वैश्विक कानूनी व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दिया है। उनका लंबा करियर कानून के शासन, न्याय और मानवाधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण है।
भारतीय तमिल मूल के परिवार में हुआ जन्म
नवी पिल्लै का जन्म दक्षिण अफ्रीका के डरबन में भारतीय तमिल मूल के एक परिवार में हुआ था। उनका शुरुआती जीवन रंगभेद की व्यवस्था के दौर में बीता। उन्होंने वकील के रूप में अपना करियर शुरू किया और भेदभाव, नस्लीय अलगाव तथा सामाजिक बहिष्कार के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी।
रंगभेद के खिलाफ संघर्ष करने वाले नेल्सन मंडेला और अन्य लोगों का बचाव करना उनके शुरुआती करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। बाद में वह दक्षिण अफ्रीका की हाई कोर्ट में न्यायाधीश बनीं। उन्होंने अपने काम से न्याय व्यवस्था में महत्वपूर्ण पहचान बनाई।
अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों में निभाई अहम भूमिका
नवी पिल्लै ने अपने करियर में कई प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में जिम्मेदारियां संभाली हैं। वह दक्षिण अफ्रीका की हाई कोर्ट, रवांडा के लिए गठित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में काम कर चुकी हैं।
वह संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त भी रही हैं। इसके अलावा, उन्होंने अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्र पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की अध्यक्षता की। नोबेल कमेटी की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वह फिलहाल अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में उस मामले की न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ी हैं, जिसमें म्यांमार पर नरसंहार के आरोप लगाए गए हैं।
यौन हिंसा को मानवता के खिलाफ अपराध मानने में योगदान
नवी पिल्लै ने रवांडा के अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में न्यायाधीश के रूप में काम करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस न्यायाधिकरण ने ऐतिहासिक फैसलों के जरिए स्थापित किया कि बलात्कार और यौन हिंसा को मानवता के खिलाफ अपराध के साथ-साथ नरसंहार के रूप में भी देखा जा सकता है।
नोबेल कमेटी के अनुसार, इस कानूनी मिसाल को स्थापित करने में पिल्लै का प्रभाव महत्वपूर्ण रहा। इसी मामले में पहली बार किसी आरोपी के खिलाफ केवल प्रचार के माध्यम से नरसंहार के लिए उकसाने के आरोप भी लगाए गए। यह अंतरराष्ट्रीय आपराधिक कानून के विकास में एक अहम पड़ाव था।
अंतरराष्ट्रीय कानून के जरिए शांति स्थापित करने पर जोर
नोबेल कमेटी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के जरिए विवादों को सुलझाना और देशों को जवाबदेह बनाना स्थायी शांति के लिए जरूरी है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के गठन से इस दिशा में प्रगति हुई। शीत युद्ध समाप्त होने के बाद अंतरराष्ट्रीय कानूनी तंत्र को और मजबूती मिली।
हालांकि, कमेटी ने यह भी माना कि नियमों पर आधारित वैश्विक व्यवस्था हमेशा समान रूप से प्रभावी नहीं रही है। कई बार शक्तिशाली देशों ने जवाबदेही से बचने की कोशिश की है और अंतरराष्ट्रीय कानून के मामलों में आरोपी तथा पीड़ित की पहचान के आधार पर अलग-अलग परिणाम देखने को मिले हैं।
इसके बावजूद, कूटनीति, संधियों और कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से विवाद सुलझाने के प्रयास बढ़े हैं। कमेटी के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय कानून अधिक शांतिपूर्ण दुनिया की बुनियाद है।
‘शांति के लिए न्याय जरूरी’
नोबेल कमेटी ने कहा कि मौजूदा दौर में दुनिया लंबे समय से जारी कई युद्धों और संघर्षों का सामना कर रही है। ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय कानून शांति और सुरक्षा का केवल पूरक नहीं, बल्कि अनिवार्य आधार बन गया है।
कमेटी ने चेतावनी दी कि वैश्विक कानूनी व्यवस्था और उससे जुड़ी संस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है। कानून और न्याय के बजाय ताकत के आधार पर फैसले लेने की प्रवृत्ति अंतरराष्ट्रीय स्थिरता, भरोसे और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को कमजोर करती है।
नवी पिल्लै ने अपने विभिन्न पदों पर रहते हुए देशों और राष्ट्रीय नेताओं को जवाबदेह ठहराने तथा हिंसा और संघर्ष के पीड़ितों को न्याय की उम्मीद देने में योगदान दिया है। उन्होंने लगातार इस बात पर जोर दिया कि व्यक्तियों और देशों को कानून के शासन का पालन करना चाहिए।
अल्फ्रेड नोबेल की सोच से जुड़ा है यह सम्मान
नोबेल कमेटी ने कहा कि 2026 का शांति पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत में व्यक्त मूल भावना से जुड़ा है। नवी पिल्लै ने अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरणों के माध्यम से शांति और न्याय को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है। उनका काम देशों के बीच सहयोग और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
कमेटी के मुताबिक, नवी पिल्लै का करियर वैश्विक स्तर पर कानून के शासन को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रक्षा करने और मानव गरिमा के सम्मान को बढ़ावा देने की जरूरत याद दिलाता है। न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता शांतिपूर्ण दुनिया की दिशा में काम करने वाले लोगों के लिए प्रेरणा है।





