रायपुर। गणेश विसर्जन के बाद अब जैसे-जैसे खारुन नदी के किनारे बने विशाल विसर्जन कुंड का पानी उतरना शुरू हुआ, वैसे-वैसे जागरुकता के दावों की सच्चाई सामने आने लगी है। जैसे-जैसे कुंड का पानी उतरा तब पता चला कि जो मिट्टी की मूर्तियां थी वो तो घुल गईं लेकिन पीओपी की मूर्तियां जस की तस बनी हुई हैं।
5500 से ज्यादा मूर्तियों का हुआ था विसर्जन
गणपति विसर्जन के दिन खारुन नदी के पास बने महादेव कुंड में 5500 से ज्यादा मूर्तियों का विसर्जन किया गया था। शहर की सबसे बड़ी मूर्ति का विसर्जन भी यहीं किया गया था। लोगों ने भारी बारिश और जलभराव के बीच बप्पा को विदाई दी थी। लेकिन अब जब हालात सामान्य हुए और नदी में पानी उतरा तब सारी मूर्तियों की सच्चाई सामने आई।





