Home Uncategorized बिहान ने दिखाई नई राह, मेहनत से कविता निषाद बनीं लखपति दीदी

बिहान ने दिखाई नई राह, मेहनत से कविता निषाद बनीं लखपति दीदी

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कभी 150 रुपए की दैनिक मजदूरी थी सहारा, आज सालाना आय 5.20 लाख रुपए

सेनेटरी पैड निर्माण से महिलाओं की सेहत का ख्याल, कृषि दुकान से किसानों को मिल रही सुविधा

रायपुर, 02 अक्टूबर 2026

कभी घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए मजदूरी करने वाली राजनांदगांव जिले के ग्राम बागरेकसा की श्रीमती कविता निषाद ने शायद ही सोचा होगा कि एक दिन वे खुद का व्यवसाय चलाएंगी और गांव की दूसरी महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की मिसाल बनेंगी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद उनके जीवन ने ऐसी करवट ली कि आज वे सेनेटरी पैड निर्माण और कृषि दुकान का सफलतापूर्वक संचालन करते हुए सालाना लगभग 5 लाख 20 हजार रुपए की आय अर्जित कर रही हैं।

150 रुपए की मजदूरी से शुरू हुआ आत्मनिर्भरता का सफर

बिहान से जुड़ने से पहले श्रीमती कविता निषाद एक सामान्य गृहणी थीं। परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग के लिए वे मजदूरी करती थीं, जिससे उन्हें करीब 150 रुपए प्रतिदिन मिलते थे। सीमित आमदनी के कारण परिवार की जरूरतें पूरी करना आसान नहीं था।इसी दौरान गांव में बिहान की सीआरपी दीदियों ने महिलाओं को स्वसहायता समूह, नियमित बचत, ऋण और स्वरोजगार के अवसरों के बारे में जानकारी दी। कविता को इसमें अपने जीवन को बदलने की संभावना दिखाई दी। उन्होंने गांव की 10 महिलाओं को साथ लेकर स्वसहायता समूह बनाया। समूह में नियमित बचत और आपसी सहयोग ने उनके भीतर नया आत्मविश्वास पैदा किया।

कविता के जीवन में एक ऐसा अवसर भी आया, जब महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी एक घटना ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने तय किया कि वे इस दिशा में कुछ ऐसा काम करेंगी, जिससे आय के साथ महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूकता भी बढ़े।बिहान से मिले एक लाख रुपए के ऋण से उन्होंने दिल्ली और आगरा की कंपनियों से सेनेटरी पैड मंगाकर बेचना शुरू किया। व्यवसाय की शुरुआत आसान नहीं रही। अपेक्षा के अनुरूप आमदनी नहीं हुई, लेकिन कविता ने प्रयास जारी रखा।

मशीन मिली तो खुद शुरू किया सेनेटरी पैड निर्माण

कविता की लगन और लगातार किए जा रहे प्रयासों को देखते हुए नाबार्ड के माध्यम से उन्हें सेनेटरी पैड निर्माण की मशीन उपलब्ध कराई गई। इसके बाद उन्होंने अपने व्यवसाय को और विस्तार देने का निर्णय लिया। एक लाख रुपए का मुद्रा ऋण लेकर सेमी-ऑटोमेटिक मशीन खरीदी और स्वयं सेनेटरी पैड का निर्माण शुरू कर दिया। अब उनका काम केवल आय अर्जित करने तक सीमित नहीं रहा। सेनेटरी पैड निर्माण और विक्रय के माध्यम से वे गांव की महिलाओं एवं किशोरियों के बीच स्वास्थ्य, स्वच्छता और मासिक धर्म संबंधी जागरूकता बढ़ाने में भी योगदान दे रही हैं।

एक व्यवसाय में सफलता मिलने के बाद कविता ने यहीं रुकने के बजाय आय का एक और साधन तैयार किया। उन्होंने 80 हजार रुपए का उद्यमी ऋण लेकर कृषि सामग्री की दुकान शुरू की। इससे आसपास के किसानों को गांव में ही आवश्यक कृषि सामग्री मिलने लगी और कविता के परिवार के लिए आमदनी का एक और स्थायी स्रोत तैयार हुआ।सेनेटरी पैड निर्माण और कृषि दुकान के संचालन से आज उनकी कुल वार्षिक आय बढ़कर लगभग 5 लाख 20 हजार रुपए हो गई है।

एक गृहणी और मजदूर से सफल उद्यमी बनने तक कविता निषाद का सफर बताता है कि सही अवसर, आर्थिक सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति से ग्रामीण महिलाएं अपनी जिंदगी में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। बिहान से मिली आर्थिक मदद और मार्गदर्शन को कविता ने अपनी मेहनत से सफल उद्यम में बदल दिया। आज वे अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ समाज के लिए भी उपयोगी भूमिका निभा रही हैं। एक ओर सेनेटरी पैड के माध्यम से महिलाओं और किशोरियों को स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर कृषि दुकान के जरिए स्थानीय किसानों को जरूरी सामग्री उपलब्ध करा रही हैं।

अपने जीवन में आए इस बदलाव के लिए श्रीमती कविता निषाद ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से मिले सहयोग पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।कविता निषाद की कहानी आज गांव की दूसरी महिलाओं को भी यह संदेश दे रही है कि आत्मविश्वास, मेहनत और उपलब्ध अवसरों का सही उपयोग किया जाए तो सीमित संसाधनों से शुरू हुआ सफर भी आर्थिक आत्मनिर्भरता की मजबूत राह बना सकता है।

 

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