मुख्यमंत्री निवास पर गुरुवार देर रात तक लगी मंत्रियों की क्लास में आखिरी अल्टीमेटम दिया गया।
रायपुर। मुख्यमंत्री निवास पर गुरुवार देर रात तक लगी मंत्रियों की क्लास में आखिरी अल्टीमेटम दिया गया। केंद्रीय संगठन ने मंत्रियों से दो टूक कहलवाया है कि जनता में किसी भी तरह का असंतोष नहीं चाहिए। जनता के हितों के कामों को प्राथमिकता देते हुए विभागीय सचिवों और अपने प्रभार वाले जिलों के कलेक्टरों से जनता के हितों के कामों पर फोकस करें और इनको प्राथमिकता के साथ पूरा करें। दो माह के अंदर अगर सुधार नहीं दिखा, तो ऐसे मंत्रियों को सीधे सिधार दिया जाएगा, यानी बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।
दिल्ली सूत्रों के अनुसार मंत्रियों के कामों की पूरी रिपोर्ट राष्ट्रीय संगठन के पास लगातार जा रही थी। राष्ट्रीय संगठन कई मंत्रियों के काम-काज को लेकर संतुष्ट नहीं है। लंबे समय से मंत्रियों में कसावट लाने की तैयारी चल रही थी। इस बीच सूरजपूर की घटना हो गई तो इसको लेकर राष्ट्रीय संगठन बेहद खफा हो गया। राष्ट्रीय संगठन ने पहले प्रदेश संगठन के जवाबदार दिग्गजों की क्लास लगाई और उनसे सीधा पूछा गया कि आप क्या कर रहे हैं। उनसे चर्चा के बाद तय किया गया कि मामला प्रशासनिक है तो संदेश देने के लिए बैठक पार्टी दफ्तर की जगह सीएम हाउस में रखी जाए और मंत्रियों को तत्काल तलब किया जाए।
पार्टी दफ्तर के स्थान पर सीएम हाउस में बैठक….
क्योंकि प्रशासनिक सख्ती का देना था संकेत
आमतौर पर अगर संगठन और सत्ता के बीच की बात होती है तो ऐसी बैठक कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में होती है, लेकिन यहां पर मामला चूंकि प्रशासनिक था और काम तो अंततः सचिवों और कलेक्टरों से ही लेना है तो ऐसे में बैठक को मुख्यमंत्री निवास में किया गया। कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को भी बुलाया गया। बैठक में राष्ट्रीय संगठन की तरफ से क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय शामिल हुए। प्रदेशाध्यक्ष किरणदेव चूंकि खुद विधायक हैं इसलिए बैठक में शामिल नहीं हुए। बतौर विधायक वे मंत्रियों की आलोचना कैसे करते. इसलिए वे बैठक से बाहर ही रहे।
दो महीने का अल्टीमेटम
सभी को दो माह का समय दिया गया है। दो माह में फिर से सभी के कामों की समीक्षा होगी, जो भी मंत्री खरे नहीं उतरेंगे उनको लेकर राष्ट्रीय संगठन फैसला करेगा कि उनका क्या करना है। बैठक में इस बात के भी सभी मंत्रियों को सख्त निर्देश दिए गए कि कोई भी बात बाहर नहीं जानी चाहिए। यही वजह है कि सभी मंत्रियों से बाहर मीडिया से बात में एक ही बात कही है कि सत्ता और संगठन में समन्वय बनाने के लिए बैठक थी और ऐसी बैठक होती रहती है। किसी ने यह नहीं बताया कि आखिर अचानक बैठक क्यों हुई और बैठक का वास्तव में एजेंडा क्या था।




