बिलासपुर हाईकोर्ट ने सम्मान निधि मामले में अहम फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता की अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल आपातकाल के दौरान मीसा में बंद होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह साबित करना जरूरी है कि हिरासत पूरी तरह राजनीतिक या सामाजिक कारणों से ही हुई हो।
दरअसल मामले में रायपुर निवासी 74 वर्षीय रामगुलाम सिंह ठाकुर ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण सम्मान निधि पाने के लिए दावा किया था। उन्होंने बताया कि वे 1975 के आपातकाल के दौरान छात्र नेता के रूप में आंदोलन में शामिल थे और उन्हें जेल में रखा गया था। इसके आधार पर उन्होंने 2008 के नियमों के तहत सम्मान निधि की मांग की थी। हालांकि, राज्य सरकार ने उनका आवेदन खारिज कर दिया था। पुलिस रिपोर्ट में उनके खिलाफ 1974 से 1986 के बीच कई आपराधिक प्रकरण दर्ज होने की जानकारी सामने आई, जिसके आधार पर उन्हें नियमों के तहत अयोग्य माना गया। हाईकोर्ट ने भी इस आधार को सही ठहराया और कहा कि नियमों के अनुसार वही व्यक्ति पात्र होगा, जो केवल राजनीतिक या सामाजिक कारणों से ही निरुद्ध रहा हो और जिसके खिलाफ आपराधिक रिकॉर्ड न हो। कोर्ट ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता ने समिति के मूल निर्णय को चुनौती नहीं दी, जिससे उनकी याचिका कमजोर हो गई। अंत में कोर्ट ने कहा कि मामले में किसी तरह की कानूनी त्रुटि या पक्षपात साबित नहीं हुआ है, इसलिए सिंगल बेंच के आदेश को सही मानते हुए अपील खारिज की जाती है।




