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उड़ती धूल बनी मौत का कारण: दीपका खदान में ट्रेलर की चपेट में आने से निजी कंपनी के मुंशी की मौत, SECL प्रबंधन पर सवाल

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उड़ती धूल बनी मौत का कारण: दीपका खदान में ट्रेलर की चपेट में आने से निजी कंपनी के मुंशी की मौत, SECL प्रबंधन पर सवाल
कोरबा/दीपका।
एसईसीएल दीपका खदान में मंगलवार देर रात एक दर्दनाक हादसा हो गया। दीपका एमटीके कैंटीन के समीप ट्रेलर की चपेट में आने से एक निजी कंपनी के मुंशी की मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल मुंशी 27 वर्षीय अरविंद सिंह को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना के समय खदान क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही जारी थी। बताया जा रहा है कि खदान में उड़ रही धूल के कारण सामने से आ रहा ट्रेलर दिखाई नहीं दिया, जिससे यह हादसा हो गया। धूल के कारण दृश्यता बेहद कम हो गई थी, जो इस दुर्घटना की बड़ी वजह मानी जा रही है।
धूल नियंत्रण पर सवाल
इस हादसे के बाद एक बार फिर एसईसीएल दीपका प्रबंधन की धूल नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खदान क्षेत्र में उड़ती धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी के छिड़काव और अन्य व्यवस्थाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आती है।
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि खदान क्षेत्र में धूल इतनी अधिक उड़ती है कि कई बार कुछ मीटर दूर तक भी साफ दिखाई नहीं देता। यदि समय पर पानी का छिड़काव और धूल नियंत्रण के उपाय किए जाते, तो संभव है कि यह हादसा टल सकता था।
लगातार हो रहे हादसों से आक्रोश
दीपका क्षेत्र में लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने मजदूरों और स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि खदानों में सुरक्षा और पर्यावरणीय नियमों को लेकर प्रबंधन गंभीर नजर नहीं आ रहा, जिसका खामियाजा कर्मचारियों और मजदूरों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठने लगी है, ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक खदानों में उड़ती धूल और लापरवाही लोगों की जान लेती रहेगी?