
कोरबा . सस्ती दर पर लोगों को राशन उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने खाद्यान्न व्यवस्था प्रारंभ की है। सार्वजनिक उचित मूल्य की दुकानों से इस काम को किया जा रहा है। फरवरी महीने में राशन के लिए शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को काफी मुश्किल उठानी पड़ी। किसी को राशन मिल तो कोई चक्कर काटते ही रह गया।

ये मायूस चेहरे कोरबा क नजदीक पाली पडनिया इलाके के हैं। यहां भी राशन से जुडी असुविधा को लेकर लोगों के सामने काफी नाराजगी है। 28 दिन की फरवरी देखते-देखते गुजर गई और इस महीने का राशन भी खत्म हो गया। इस इलाके की सार्वजनिक उचित मूल्य की दुकान में एक ही बार राशन उपलब्ध हुआ और फिर भी सभी लोगों को नहीं मिल सका। जो लोग भाग्यशाली थे उनके खाते में राशन आया और बाकी के हिस्से में असंतोष। यहां के ग्रामीण से बातचीत हुई तो उसे इसी तरह की जानकारी दी और सिस्टम पर ठीकरा फोड़ा। इसी गांव के लक्ष्मी नारायण से बातचीत हुई तो उसने भी नाराजगी के स्वर में बताया कि यहां की व्यवस्था का भगवान ही मालिक है। चेहरे के लिए पीडीएस दुकान खोली गई है लेकिन 2 घंटे से ज्यादा या खोल नहीं और वह भी सीमित दिन के लिए ही।

याद रहे कुछ दिन पहले ही कोरबा शहरी क्षेत्र में राशन नहीं मिलने को लेकर उपभोक्ताओं ने पीडीएस दुकानों में जमकर हंगामा किया था। जब मामला दुकान में बिगड़ा तो पीडीएस दुकान संचालकों ने नागरिक आपूर्ति निगम के गोडाउन पहुंचकर वहां भी हंगामा किया। इसके बाद प्रशासन ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और पूरी व्यवस्था को ठीक करने की जिम्मेदारी एसडीएम को दी। व्यवस्था में परिवर्तन किए जाने के आदेश के बाद भी विभिन्न क्षेत्रों में व्यवस्था बनी हुई है। सवाल इस बात का है कि जब पीडीएस दुकान संचालकों के द्वारा समय पर विभाग को डिमांड ड्राफ्ट प्रस्तुत किया जा रहा है तो फिर नागरिक आपूर्ति निगम से राशन उपलब्ध कराने का काम क्यों नहीं किया जा रहा है। जब तक इस प्रकार की मनमानी जारी रहेगी लोग हंगामा तो करेंगे ही




