Home Astrology छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अब स्कूल शिक्षा विभाग ही लेगा 5वीं-8वीं...

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अब स्कूल शिक्षा विभाग ही लेगा 5वीं-8वीं की परीक्षा, निजी स्कूलों को झटका

0
112

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अब स्कूल शिक्षा विभाग ही लेगा 5वीं-8वीं की परीक्षा, निजी स्कूलों को झटका

बिलासपुर/रायपुर | छत्तीसगढ़ की स्कूली शिक्षा व्यवस्था और निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायालय ने निजी स्कूलों की याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रदेश में कक्षा 5वीं और 8वीं की वार्षिक परीक्षाएं अब स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से ही आयोजित की जाएंगी।

6200 स्कूलों पर लागू होगा आदेश

इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल (CG Board) से मान्यता प्राप्त प्रदेश के लगभग 6200 निजी हिंदी और अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की स्वायत्तता खत्म हो गई है। अब इन स्कूलों को अपनी मर्जी से परीक्षा लेने का अधिकार नहीं होगा; उन्हें शासन द्वारा तय परीक्षा प्रणाली और समय-सारणी का पालन करना अनिवार्य होगा।

‘फर्जी’ और ‘संदिग्ध’ स्कूलों पर गिरेगी गाज

हाईकोर्ट के इस आदेश को उन स्कूलों के लिए करारा झटका माना जा रहा है जो बिना वैध मान्यता या संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर संचालित हो रहे थे।

छत्तीसगढ़ : सरकारी कर्मचारियों की विधानसभा सत्र तक छुट्टियां रद्द, जिले से बाहर जाने पर भी लगी रोक

छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से, कवासी लखमा लेंगे हिस्सा ,साय सरकार लाएगी धर्मांतरण के खिलाफ बिल

सीबीएसई के नाम पर धोखा: कई स्कूल खुद को सीबीएसई (CBSE) से संबद्ध बताकर एडमिशन ले रहे थे, जबकि उनके पास न तो वैध मान्यता थी और न ही शासन की अनुमति।

सामने आएगी असलियत: अब जब परीक्षाएं सरकारी स्तर पर होंगी, तो ऐसे फर्जी स्कूलों का डेटाबेस और उनकी असलियत खुलकर सामने आ जाएगी।

चत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर मांग की थी कि उन्हें 5वीं और 8वीं की परीक्षाएं स्वयं आयोजित करने की अनुमति दी जाए।

सुनवाई के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता विकास तिवारी ने हस्तक्षेप याचिकाकर्ता (Intervener) के रूप में कोर्ट के सामने छात्रों और अभिभावकों का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने दलील दी कि:

निजी स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता और पारदर्शिता का अभाव है।

फर्जी स्कूलों के कारण हजारों बच्चों का भविष्य अधर में लटका है।

नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए शासन का नियंत्रण अनिवार्य है।

पारदर्शिता की ओर बढ़ता कदम

कोर्ट के इस आदेश के बाद अब परीक्षा के आयोजन, मूल्यांकन और निगरानी की पूरी जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग की होगी। इससे न केवल परीक्षा प्रणाली में एकरूपता आएगी, बल्कि शिक्षा के गिरते स्तर और निजी स्कूलों की मनमानी पर भी लगाम लगेगी

error: Content is protected !!