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मामा भांजा तालाब में है सोने का भंडार . तालाब में नहाना तो दूर पास भी नहीं जाते ग्रामीण

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कोरबा . भारत के कई हिस्सों में स्थानीय तालाबों के बारे में ऐसी कहानियां प्रचलित हैं कि उनमें खजाना छिपा है, और खुदाई में कुछ चीजें मिलने पर जिज्ञासा और बढ़ जाती है। कोरबा में भी एक रहस्यमयी तालाब है। दावा किया जाता है कि उस तालाब में सोना– चांदी और हीरे–जवारात से भरा हंडा यानी खजाना दफन है। हण्डा कभी कभी बाहर निकलता है। आखिर तालाब में खजाना कहां से आया? गांव के लोग उस ताल से डरते हैं। आइए इस रिपोर्ट में देखते हैं।

कोरबा के रजकम्मा गांव में स्थित ये तालाब साधारण तलाब नहीं। ये अपनी तलहटी में कई रहस्यों को समेटे हुए है। तालाब के बीचों बीच अकूत खजाना मौजूद है। सोना चांदी और हीरे जेवरातों से भरा हांडा जो मजबूत जंजीरों से जकड़ा हुआ है। कभी कभी बाहर आता है। कई लोगों द्वारा इसे देखे जाने का भी दावा किया जाता है।

इस तालाब को मामा–भांजा तालाब कहा जाता है। बताया जाता है कि तालाब के आसपास मामा और भांजे का खेत है। दोनों धान की खेती करते थे। एक साल भांजे की अपेक्षा मामा के खेत में फसल की अच्छी पैदावार हुई। भांजा निराश था, इस बात से बेखबर कि उसके खेत में धान नहीं बल्कि सोने की पैदावार हुईं है। इसकी भनक मामा को लग चुकी थी। मामा ने भांजे को अपने खेत की फसल दे दी और उसका धान काटकर घर ले जाने लगा। मगर जिस बैलगाड़ी में फसल लोड थी वो मामा के घर जाने के बजाए भांजे के घर की ओर जा रही थी। गुस्से में आकर मामा ने बैलों को चाबुक से मारा तो बैल, गाड़ी को खींचते हुए इस तालाब में समा गए।

भांजे को गुमराह कर सोने की फसल हासिल करने की मामा के मंसूबे पर पानी फिर गया। वो खजाना आज भी इस तालाब में दफन है। लोग बताते है कि तालाब में अजीबोगरीब हलचल होती है, डरावनी आवाजे आती है। इतना ही नहीं हांडा और जंजीर बाहर निकलते है। यही वजह की लोग इस तालाब में नहाना तो दूर करीब आने से भी डरते हैं।

क्या वाकई इस तालाब में कोई खजाना दफन है? क्या वाकई इस तालाब की तलहटी में रूहानी शक्ति सांस ले रही है? क्या वाकई में भांजे की सोने की फसल इसमें समाई है। ये रहस्यमई तालाब भले ही खूबसूरत लगता हो मगर इस ताल से जुड़े अफसाने रोंगटे खड़े कर देते है।