Home Uncategorized सांसद ज्योत्सना-महंत ने ‘वंदे मातरम्’ को छत्तीसगढ़ का शौर्य बताया:संसद में कहा-...

सांसद ज्योत्सना-महंत ने ‘वंदे मातरम्’ को छत्तीसगढ़ का शौर्य बताया:संसद में कहा- कुछ लोग इतिहास को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत कर रहे हैं

0
57

नई दिल्ली: कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत ने ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर संसद में हुई चर्चा के दौरान, इस गीत को मातृभूमि के प्रति सम्मान से जोड़ते हुए, स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के योगदान पर प्रकाश डाला।

1. छत्तीसगढ़ की माटी से जुड़ाव

सांसद महंत ने अपने वक्तव्य की शुरुआत में ही छत्तीसगढ़ की माटी से अपने जुड़ाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वह उस भूमि से आती हैं जहाँ:

आदिवासियों का बलिदान: “मैं उस छत्तीसगढ़ की माटी से आती हूँ जहाँ के आदिवासियों ने वंदे मातरम् के उदघोष के साथ अंग्रेजों का सामना किया था और गोलियाँ भी खाई।”

शहीदों का सम्मान: उनका यह कथन इस बात को दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी न केवल स्वतंत्रता संग्राम में शामिल थे, बल्कि उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ को देशभक्ति और क्रांति के नारे के रूप में इस्तेमाल किया था। यह उद्घोष उनके लिए केवल एक गीत नहीं, बल्कि मातृभूमि की रक्षा के लिए मर मिटने की प्रेरणा था।

2. देशभक्ति का वास्तविक अर्थ

सांसद ने ‘वंदे मातरम्’ की भावना को वर्तमान संदर्भों से जोड़ते हुए कहा कि इस गीत को वास्तविक सम्मान देने का अर्थ देश की समस्याओं को दूर करना है। उनके अनुसार, धरती माँ का सम्मान तब होगा जब हम:

जन समस्याओं का समाधान: बेरोजगारी, महंगाई और प्रदूषण जैसी समस्याओं से देश को निजात दिलाएंगे।

प्रकृति की रक्षा: ‘सुजलाम सुफलाम’ (जल से परिपूर्ण, फल-फूल से युक्त) जैसी पंक्तियों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि हमें अपनी नदियों, पहाड़ों, जंगलों, और कृषि भूमि की रक्षा करनी चाहिए।

सभी धर्मों का सम्मान: उनकी यह टिप्पणी भी महत्वपूर्ण थी कि धरती माँ कभी अपने बच्चों में भेदभाव नहीं करती, इसलिए सच्ची देशभक्ति में सभी धर्मों और समुदायों के प्रति सम्मान निहित है।

3. स्वतंत्रता सेनानी विरासत

उन्होंने यह भी बताया कि वह एक ऐसे परिवार से आती हैं, जहाँ उनके दादाजी और ससुर दोनों स्वतंत्रता सेनानी थे, जिससे उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ के भावनात्मक और ऐतिहासिक महत्व को करीब से समझा है।

4.इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने का आरोप
उन्होंने कहा, “आज, कुछ राजनीतिक लाभ लेने के लिए इतिहास को तोड़-मरोड़कर इस तरह से प्रस्तुत किया जा रहा है कि एक देशभक्ति गीत को भी झगड़े में डाल दिया गया।” उन्होंने कहा कि इस पूरे देशभक्ति गीत को इस तरह विवादों में डाल दिया गया है कि ‘इसे छोटा क्यों किया गया’।

उनका इशारा प्रधानमंत्री मोदी और सत्ता पक्ष के उस आरोप की ओर था, जिसमें कहा गया था कि कांग्रेस ने 1937 में वंदे मातरम् के कुछ प्रमुख छंदों (लाइनों) को हटा दिया था, जिससे देश के विभाजन के बीज बोए गए।
5. ज्योत्सना महंत ने अपने बयान में प्रियंका गांधी वाड्रा का भी ज़िक्र किया।

उन्होंने कहा कि हमारी प्रियंका जी ने बिल्कुल सही कहा कि इस चर्चा को महंगाई, बेरोजगारी, और वायु प्रदूषण जैसे वास्तविक मुद्दों पर केंद्रित होना चाहिए, जिनसे आज देश लगातार जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर हम सब मिलकर वंदे मातरम् को सम्मान देना चाहते हैं, तो इन गंभीर समस्याओं से देश को निजात दिलाएं।