
कोरबा . कोरबा जिले में प्रशासन के द्वारा बार-बार स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि किसी भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को रेफरल सेंटर नहीं बनाया जाना चाहिए और यहां पर मरीजों को आवश्यक सुविधा दी जानी चाहिए। इसके बाद भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का रवैया मरीज के मामले में नकारात्मक बना हुआ है। दर्री के अयोध्यापूरी स्वास्थ्य केंद्र में एक गर्भवती को सुविधा नहीं मिली और इसके नतीजे कुछ घंटे बाद ऑटो में ही इसका प्रसव हो गया।
अयोध्यापुरी क्षेत्र में रहने वाले बाबूलाल विश्वकर्मा राजमिस्त्री का काम करते हैं। पत्नी सीमा गर्भवती थी और उसे पिछले दिवस उसे प्रसव पीड़ा हुई। बाबूलाल ने बताया कि जल्दबाजी में पत्नी को स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया जहां पर मौजूद स्टाफ ने उपचार करने के बजाय उसे हायर सेंटर भेजने की बात कही।
बाबूलाल ने अपने घर के लोगों से इस बारे में बातचीत की और कुछ देर के बाद एक सवारी ऑटो की व्यवस्था कर पत्नी को कोरमा के मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाने की तैयारी की। कुछ किलोमीटर तक मामला ठीक-ठाक रहा और इसी दरमियान सीमा का प्रसव हो गया।
कई तरह की जोखिम और आशंका के बीच परिवार के लोगों ने प्रसूता और नवजात को अस्पताल भिजवाया। जहां पर उनका उपचार किया जा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर इस बात को उजागर कर दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए जिस तरह के दावे कोरबा जिले में बड़े अधिकारी लगातार कर रहे हैं, उनका वास्तविक सच कुछ और है।




