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माओवादियों के खिलाफ अब पुलिस का पोस्टर वार, गांव-गांव में लगाए पोस्टर, आम लोगों से मांगा सहयोग

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माओवादियों के खिलाफ अब पुलिस का पोस्टर वार, गांव-गांव में लगाए पोस्टर, आम लोगों से मांगा सहयोगIMG 20250919 WA00381

पखांजूर। कांकेर जिले में पुलिस ने अंदरूनी गांवों में वांछित माओवादियों के बैनर–पोस्टर लगाकर उन पर इनाम घोषित किया है। पुलिस ने परलकोट क्षेत्र के अंदरूनी और माओवादी प्रभावित इलाकों में इस तरह की पहल शुरू की। पुलिस ने यहां के गांवों और जंगलों में वांछित माओवादियों के पोस्टर और बैनर लगाए हैं, ताकि स्थानीय लोगों की मदद से इन माओवादियों को पकड़ा जा सके। इस कदम को माओवाद के खिलाफ लड़ाई में एक नया मोड़ माना जा रहा है।
इन पोस्टरों में वांछित माओवादियों की तस्वीरें, उनके नाम और उन पर घोषित इनाम की जानकारी दी गई है। साथ ही, पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर उन्हें इन माओवादियों के बारे में कोई भी जानकारी मिले, तो वे तुरंत पुलिस को सूचित करें। जानकारी देने वाले की पहचान गुप्त रखी जाएगी। अक्सर, स्थानीय लोग माओवादियों के बारे में बहुत कुछ जानते हैं, लेकिन डर की वजह से वे पुलिस को नहीं बताते। इन पोस्टरों से न केवल उन्हें जानकारी मिलेगी, बल्कि उन्हें यह भी एहसास होगा कि उनकी मदद से इन अपराधियों को पकड़ा जा सकता है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य माओवादियों को उनके अपने गढ़ में ही कमजोर करना है। जब स्थानीय आबादी उनके खिलाफ हो जाएगी और उनके बारे में जानकारी देना शुरू कर देगी, तो उनके लिए छिपना और अपनी गतिविधियों को अंजाम देना मुश्किल हो जाएगा।
पोस्टर में पांच लाख के इनामी माओवादियों के नाम

पुलिस द्वारा बैनर में माओवादी बसंती आंचल, पुष्पा हेमला, रामा कुंजाम, श्रवण मरकर, विश्वनाथ, रामको मंडावी, रानी उर्फ उमा, जानकी सोरी पर पांच-पांच लाख रुपये और मनीषा कोर्राम, जमली मंडावी, कुमारी मंगली, कमला पददा दर्रो पर एक-एक लाख का इनाम घोषित है। इसके अलावा, अन्य स्थानों पर अलग-अलग माओवादियों के नाम और इनाम का भी उल्लेख किया गया है।

पुलिस को सफलता की उम्मीद

यह पहला मौका नहीं है जब पुलिस ने इस तरह की रणनीति अपनाई है, लेकिन इस बार इसे और बड़े पैमाने पर और व्यवस्थित तरीके से लागू किया गया है। पुलिस को उम्मीद है कि इस पहल से उन्हें वांछित माओवादियों को पकड़ने में बड़ी सफलता मिलेगी और क्षेत्र में शांति बहाल करने में मदद मिलेगी। अब देखना बाकी है कि यह पहल कितनी प्रभावी साबित होती है, लेकिन यह साफ है कि पुलिस माओवाद के खिलाफ लड़ाई में नए और रचनात्मक तरीके अपना रही है।