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बारूद की फैक्ट्री का भूमिपूजन करने पहुंचे कंपनी के लोग ग्रामीणों का विरोध देख वापस लौटे

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बारूद की फैक्ट्री का भूमिपूजन करने पहुंचे कंपनी के लोग ग्रामीणों का विरोध देख वापस लौटे
घरघोड़ा। रायगढ़ के घरघोड़ा अंचल में आदिवासी बहुल डोकरबुड़ा, राबो, गतगांव और हर्राडीह की ज़मीन पर एक बार फिर जनविरोध की ज्वाला भड़क उठी, जब ब्लैक डायमंड कंपनी के अफसर–कर्मचारी बारूद प्लांट के लिए भूमि पूजन करने पहुंचे। वर्षों से विरोध कर रहे ग्रामीणों ने एकजुटता की मिसाल पेश करते हुए कंपनी को बैरंग लौटा दिया।

दरअसल ब्लैक डायमंड कंपनी द्वारा आदिवासी बहुल ग्राम डोकरबुड़ा, राबो, गतगांव और हर्राडीह की ज़मीन पर प्लांट स्थापित करने की कोशिशों के खिलाफ लंबे समय से ग्रामीणों का विरोध जारी है। इसके बावजूद प्रशासन ने जंगल की ज़मीन का डायवर्सन कर दिया। इस दौरान न तो आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की परवाह की गई और न ही जनभावनाओं की। जैसा रायगढ़ जिले में कोयला खदानों के लिए फर्जी ग्राम सभाओं का सहारा लिया जा रहा है, वैसा ही तरीका अपनाकर यहां बारूद प्लांट शुरू करने के लिए किया जा रहा है।

यहां जब कंपनी भूमि पूजन कर काम शुरू करने वाली थी, तब गांव की महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया, और इसी जनआक्रोश के चलते कंपनी को कार्यक्रम रद्द कर बैरंग लौटना पड़ा। ग्रामीण आदिवासियों का कहना है कि यह विरोध एक जंग है, हक, अस्तित्व और आत्मसम्मान की। प्रशासन द्वारा जंगल की ज़मीन का डायवर्सन, न केवल संवैधानिक अधिकारों की अवहेलना है, बल्कि आदिवासी अस्मिता पर सीधा प्रहार भी है।

सांसद राठिया की चुप्पी से ग्रामीण नाराज

इस मामले में इलाके के सांसद राधेश्याम राठिया की चुप्पी इस पूरे घटनाक्रम पर मौन सहमति का संकेत देती दिख रही है और इससे ग्रामीण काफ़ी नाराज हैं। ग्रामीणों का कहना है – “हमारी चुप्पी हमारे जंगल, जल, ज़मीन को निगल जाएगी। इसलिए हम बोल रहे हैं, और अब रुकेंगे नहीं।”

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