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पीएम आवास घोटाले में ग्राम सचिव निलंबित, ब्लॉक समन्वयक को जिला पंचायत में किया गया अटैच, जल्द ही मामला होगा पुलिस के सुपुर्द

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कोरबा। जनपद पंचायत कोरबा के सांसद आदर्श ग्राम पंचायत तिलकेजा में हुए पीएम आवास घोटाले के उजागर होने के बाद कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है। जिला पंचायत सीईओ ने पहली कार्रवाई के तौर पर ग्राम सचिव को निलंबित करते हुए ब्लॉक समन्वयक को जिला पंचायत अटैच कर दिया है। वहीं जल्द ही सरपंच और अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।

 

ग्राम पंचायत तिलकेजा में फर्जी ग्रामसभा आयोजित कर पूर्व के वर्षों में पीएम आवास के लिए अपात्र घोषित हुए ग्रामीणों को पात्र बना दिया गया था। इनमें लगभग 11 ऐसे हितग्राही भी थे जिनका निधन हो चुका है। इस मामले की शिकायत के बाद जांच हुई और प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई शुरू की गई है।

 

जिला पंचायत कोरबा के सीईओ आईएएस प्रतीक जैन ने मीडिया से चर्चा में बताया कि कोरबा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत तिलकेजा में 48 अयोग्य हितग्राहियों के नाम से पीएम आवास स्वीकृत और राशि आहरित होने की शिकायत मिली थी। प्रथम दृष्टया यह गड़बड़ी पंचायत से ही शुरू हुई है। इस वजह से पंचायत सचिव नविता दूबे को निलंबित कर दिया गया है। वहीं पीएम आवास के ब्लाक समन्वयक देवानंद श्रीवास को जिला पंचायत अटैच किया गया है। मामले की पूरी जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया है। राशि की वसूली के साथ दोषी अधिकारी व कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

 

दरअसल इस मामले में शिकायत के बाद 3 सदस्यीय जांच समिति ने तिलकेजा के सरपंच/सचिव को 48 हितग्राहियों का राशि जिनके खाते में गई उनका आधार कार्ड, बैंक पासबुक का प्रथम पृष्ठ एवं मृत्यु प्रमाण पत्र जारी रजिस्टर लेकर दिनांक 13.08.2026 को कार्यालय उप संचालक पंचायत जिला कोरबा में उपस्थित होने कहा गया था किंतु सरपंच/सचिव उपस्थित नही हुए। इसी तरह श्रीमती नविता दूबे सचिव ग्राम पंचायत तिलकेजा को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया जाकर 03 दिवस के भीतर जवाब चाही गई थी किंतु श्रीमती दूबे द्वारा कारण बताओ सूचना पत्र का जवाब नही दिया गया एवं जांच में सहयोग नही करने के फलस्वरूप शासकीय कार्यों के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता बरती गई है। उनका यह कृत्य छ.ग. पंचायत सेवा आचरण नियम 1998 के विपरीत होने से छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (अनुशासन तथा अपील) नियम, 1999 के भाग दो नियम 4 के तहत् एतद् द्वारा निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय जनपद पंचायत कोरबा निर्धारित किया गया है एवं इन्हे नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता रहेगी।

 

बता दें कि प्रधानमंत्री आवास योजना में ग्राम स्तर पर आवास मित्र और जनपद स्तर पर ब्लॉक समन्वयक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इस मामले की जांच के दौरान ब्लॉक समन्वयक देवानंद श्रीवास ने जांच टीम के समक्ष अपना बयान तो दिया मगर बताया जा रहा है कि उसके बाद से वह अपनी ड्यूटी से अनुपस्थित है और बुलाने पर भी नहीं आ रहा है। मामले की जांच में महत्वपूर्ण कड़ी होने के चलते जिला पंचायत सीईओ ने फिलहाल उसे अपने कार्यालय के पीएम आवास शाखा में अटैच किया है, ताकि उससे मामले की सारी जानकारी निकलवाई जा सके। हालांकि इसकी उम्मीद कम है कि वह उपस्थित होकर जांच में सहयोग करेगा।

 

ग्राम तिलकेजा में अपात्रों को पात्र बनाने का जो मामला प्रकाश में आया है, उसकी शिकायत करने वाले जितेंद्र साहू के मुताबिक इसमें कुल 55 कथित हितग्राहियों के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया है। इनमें 11 मृतक हैं। इन सभी के नाम पर पीएम आवास की पहली किश्त 40-40 हजार रूपये निकलवाई गई और इसकी कुल रकम लगभग 22 लाख रूपये होती है।

 

इस मामले में एक जानकारी यह भी सामने आयी है कि जिस तरह मृत हितग्राहियों के पैसे किसी अन्य के खातों में भेजे गए हैं,उसी तरह अन्य हितग्राहियों को फर्जी तरीके से पात्र घोषित कर उनके आवास की पहली किश्त की राशि भी दूसरों के खाते में भेजी गई है। रकम भेजे जाने के बाद संबंधित खातेदारों से मिलकर कहा गया कि गलती से पंचायत की राशि उनके खाते में चली गयी है, उसे वापस करें। इस दौरान उन्हें बतौर कमीशन कुछ रकम दिए जाने की जानकारी सामने आ रही है।

 

तिलकेजा पंचायत में हुए घोटाले का लगभग पूरी तरह पर्दाफाश हो गया है, मगर गड़बड़ी से संबंधित दस्तावेज पंचायत से गायब कर दिए गए हैं, वहीं मामले से जुड़े सरपंच-सचिव, आवास मित्र, ब्लॉक समन्वयक सहित अन्य लोग कुछ भी सहयोग नहीं कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि फर्जी ग्राम सभा की बैठक में कुछ पंच भी शामिल रहे हैं और वे भी जांच के दायरे में हैं।

 

माना जा रहा है कि कुछ दिनों की प्रतीक्षा के बाद संबंधितों के खिलाफ विधिवत कार्रवाई की जाएगी और मामला पुलिस के सुपुर्द कर दिया जायेगा। बहरहाल इस तरह के घोटाले दूसरी पंचायतों में भी हुए हैं और उनकी जांच भी शुरू हो गई है।