झीरम घाटी मामले में 13 साल बाद NIA कोर्ट के फैसले से सियासत गरमा गई। उमेश पटेल ने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही, वहीं पीड़ितों ने जांच पर सवाल उठाए।
। बहुचर्चित झीरम घाटी हमले के मामले में करीब 13 साल बाद एनआईए कोर्ट का फैसला आने के बाद छत्तीसगढ़ में सियासी हलचल तेज हो गई है। कोर्ट ने मामले में 10 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई है। फैसले के बाद कांग्रेस और भाजपा नेताओं के साथ ही झीरम कांड के पीड़ितों और प्रत्यक्षदर्शियों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
उमेश पटेल बोले- फैसले का स्वागत, साजिश वाले पहलू पर जाएंगे सुप्रीम कोर्ट
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे नंदकुमार पटेल के बेटे और पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने एनआईए कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि एनआईए ने जिन लोगों को दोषी माना है, उस फैसले का वे स्वागत करते हैं। हालांकि उन्होंने झीरम हमले की कथित साजिश के पहलू को लेकर आगे कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कही। उमेश पटेल के मुताबिक, इस मामले में साजिश के पहलू को लेकर उनकी ओर से पहले भी मांग उठाई गई थी। अब इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की बात उन्होंने कही है।
प्रत्यक्षदर्शी विवेक बाजपेई फैसले से असंतुष्ट
झीरम कांड के पीड़ित और प्रत्यक्षदर्शी विवेक बाजपेई उर्फ चिका ने भी कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने फैसले पर संतुष्टि जताने के साथ ही जांच और सुनवाई के दौरान सामने आए कुछ पहलुओं पर असंतोष जाहिर किया। विवेक बाजपेई का कहना है कि मामले में बड़ी संख्या में लोगों को आरोपी बनाए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन कोर्ट के फैसले में 10 लोगों को ही सजा सुनाई गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एनआईए ने मामले से जुड़े पीड़ितों के बयान दर्ज नहीं किए। उन्होंने संकेत दिया कि फैसले से असंतुष्ट होकर वे जल्द ही हाईकोर्ट की शरण ले सकते हैं।
घायल कांग्रेस नेता शिव सिंह ठाकुर ने भी उठाए सवाल
झीरम हमले में घायल कांग्रेस नेता शिव सिंह ठाकुर ने भी एनआईए की जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि एनआईए ने कोर्ट में किन-किन लोगों के बयान दर्ज कराए हैं। शिव सिंह ठाकुर ने दावा किया कि घटना के बाद से अब तक एनआईए ने उनसे पूछताछ नहीं की और न ही उनका बयान दर्ज किया। उन्होंने कहा कि झीरम मामले में नक्सली संगठन के बड़े नेताओं और कमांडरों के नाम सामने आते रहे हैं, ऐसे लोगों से भी पूछताछ होनी चाहिए और उन्हें जांच की प्रक्रिया में लाया जाना चाहिए।
बृजमोहन अग्रवाल बोले- सच सामने आना जरूरी
एनआईए कोर्ट के फैसले पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अदालत का फैसला आ चुका है और आरोपियों को दोषी करार दिया गया है। उन्होंने झीरम घाटी में राजनीतिक दल के नेताओं की हत्या को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि झीरम मामले में कांग्रेस के नेता लगातार सबूत होने की बात कहते रहे हैं। यदि उनके पास कोई साक्ष्य है तो उसे जांच एजेंसी और न्यायालय के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि झीरम की घटना के कारण एक पूरी पीढ़ी प्रभावित हुई है और इस मामले का पूरा सच सामने आना चाहिए।
‘देर आए, दुरुस्त आए’, हाईकोर्ट जाने का भी विकल्प
सांसद श्री अग्रवाल ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि न्यायालय ने अपना निर्णय दिया है और इसके लिए न्यायपालिका का धन्यवाद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह निचली अदालत का फैसला है और संबंधित पक्षों के पास आगे हाईकोर्ट जाने का रास्ता खुला है








