
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के पूर्व जिले में साक्षरता पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है। इस पखवाड़ा के तहत विद्यालयों और महाविद्यालयों में विभिन्न प्रतियोगिताएं और जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में सार्वजनिक स्थलों पर नुक्कड़ नाटक, लोकगीत और संगीत के माध्यम से आम नागरिकों को साक्षरता के प्रति जागरूक किया गया।
जिला जेल कोरबा में साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत संगीत के माध्यम से कैदियों को साक्षर बनने के लिए जागरूक किया गया। कार्यक्रम में लोकगीतों की प्रस्तुति ने ऐसा समां बांधा कि सभी कैदी मंत्रमुग्ध हो गए। Clip
कार्यक्रम में शिक्षक कृष्णानंद चौहान ने राज्यगीत ‘अरपा पैरी के धार’ और शिक्षा प्रेरणा गीत ‘चला दीदी पढ़े बर जाबो’ की प्रस्तुति दी। वहीं सत्यनारायण मनहर ने ‘चलव ओ दीदी, चलव वो बहनी, स्कूल पढ़े जाना है’ और ‘झोला दे दे दीदी, ओ पाठशाला जाबो न’ जैसे प्रेरणादायी गीत प्रस्तुत कर लोगों को शिक्षा का महत्व समझाया। ढोलक पर कृष्णा वैष्णव और पवन सिंह चौहान ने संगत दी।
इस अवसर पर जिला परियोजना अधिकारी ज्योति शर्मा ने कहा कि उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के माध्यम से असाक्षरों को साक्षर बनाया जा रहा है। साक्षर होने के बाद कोई भी व्यक्ति नौकरी के लिए आवेदन कर सकता है। साक्षर होकर समाज, जिला, राज्य और देश का नाम रोशन करना है। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का शिक्षित और साक्षर होना आवश्यक है।
जेलर अमितेश साहू ने बताया कि 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर व्यक्तियों को साक्षर बनाने के उद्देश्य से 27 सितंबर 2026 को महापरीक्षा का आयोजन किया जाएगा। जिले के सभी असाक्षर व्यक्ति इस महापरीक्षा में शामिल होकर साक्षरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा सकते हैं।
संदीप शर्मा, रामकुमार कुर्रे और प्रधान पाठक अंधरी कछार ने भी उल्लास और साक्षरता के संबंध में प्रेरणादायी उद्बोधन दिया। उन्होंने अपील की कि साक्षरता केवल पढ़ना-लिखना सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को आत्मनिर्भर और जागरूक बनाने का माध्यम है।
अधिकारियों ने कहा कि आइए हम सभी मिलकर “सभी पढ़ें, सभी बढ़ें और सभी को साक्षर करें” के संकल्प को साकार करें। साक्षरता पखवाड़ा के तहत आयोजित यह कार्यक्रम उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के उद्देश्यों को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक सार्थक पहल रहा।









