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US: अमेरिका के इस शहर में लगा राम मंदिर का बड़ा बोर्ड, भव्यता से हजारों लोगों का खींच रहा ध्यान

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acn18.com ह्यूस्टन /अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण अपने अंतिम चरण में है। 22 जनवरी को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि स्थल पर मंदिर का उद्घाटन होगा और प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। लेकिन अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनने तक की यात्रा कतई आसान नहीं थी। रामजन्म भूमि पर मस्जिद के निर्माण से लेकर वापस राम लला के भव्य मंदिर बनने तक लगभग पांच सदियां लग गईं। चुनौतियों और लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार भक्तों को उनका राम मंदिर मिल रहा है। इसी को लेकर देश ही नहीं बल्कि दुनिया के हर कोने में उत्साह और जश्न मनाया जा रहा है। राम मंदिर के भूमि पूजन से पहले ह्यूस्टन में श्री राम के सार को बताने वाला एक बड़ा बोर्ड लगाया गया है। इस बोर्ड ने सोमवार को हजारों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

यह है खासियत
बता दें, ये कोई आम बोर्ड नहीं है। इस तीन सौ फीट लंबे बोर्ड में मंदिर के उद्घाटन के बारे में जानकारी दी गई है। ग्रीन कुंभ यात्रा और राम सेतु बचाओ अभियान के संस्थापक लिविंग प्लैनेट फाउंडेशन की डॉ. कुसुम व्यास ने इस बोर्ड को डिजाइन किया। इस लगवाने में स्वयंसेवक उमंग मेहता ने साथ दिया। वहीं, ग्रेटर ह्यूस्टन के हिंदू (एचजीएच) संगठन ने लोगों को प्रेरित करके फंड जुटाया और बोर्ड के लिए दिया। इस बोर्ड को ह्यूस्टन में एक जानी मानी जगह पर लगाया गया है। इस बड़े बोर्ड में 21 जनवरी को ह्यूस्टन के गुजरात समाज में होने वाले उत्सव के बारे में भी बताया गया है। साथ ही सभी ह्यूस्टनवासियों को खुला निमंत्रण दिया गया है।भगवान राम के सार को बताने के लिए…
डॉ. कुसुम व्यास ने बताया, ‘मुख्य उद्देश्य एक बोर्ड बनाना था, जो श्री राम और अयोध्या के लोकाचार से जुड़ा हुआ हो। हमने भगवान का स्वागत करने के लिए बोर्ड बनाया है। साथ ही यह श्री राम और अयोध्या के वास्तविक सार को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने पर केंद्रित है।’

उन्होंने आगे कहा, ‘इतिहास में पहली बार, एक प्रमुख अमेरिकी शहर का आसमान प्रभु श्री रामजी द्वारा सुशोभित होगा और एक महीने में हर हफ्ते करीब 15 लाख लोगों को श्री राम और अयोध्या मंदिर के दर्शन का सौभाग्य मिलेगा।’

500 वर्षों के लंबे संघर्ष का परिणाम
वहीं, उमंग मेहता ने कहा, ‘अयोध्या में राम मंदिर बनना 500 वर्षों के लंबे संघर्ष का परिणाम है। हालांकि हम व्यक्तिगत रूप से अयोध्या नहीं जा सकते हैं। इसलिए हम श्री राम और अयोध्या मंदिर को ह्यूस्टन लाना चाहते हैं और सभी को अपने जीवनकाल में इस महत्वपूर्ण अवसर का हिस्सा बनने का एहसास देना चाहते हैं। इस खूबसूरत विशाल आकार के बोर्ड के साथ, हमने उस लक्ष्य को हासिल किया है।’