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रतनपुर महामाया मंदिर में होती है देवी माता के तीन स्वरूपों की पूजा,23 हजार से अधिक मनोकामना ज्योति कलश स्थापित

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रतनपुर से रवि तम्बोली के साथ कान्हा तिवारी की रिपोर्ट

चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन ऐतिहासिक नगरी रतनपुर भक्ति और श्रद्धा के रंग में डूबी नजर आई। विश्व प्रसिद्ध मां महामाया देवी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और “जय माता दी” के जयघोष से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा।

इस अवसर पर मां महामाया के कूष्मांडा स्वरूप की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। मान्यता है कि मां कूष्मांडा अपने भक्तों के समस्त कष्टों का नाश कर सुख, समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। इसी आस्था के साथ हजारों श्रद्धालु दूर-दराज से पहुंचकर मां के दरबार में शीश नवाते नजर आए।

 

इस वर्ष महामाया मंदिर में 23 हजार से अधिक मनोकामना ज्योति कलश स्थापित किए गए हैं, जो चौथे दिन भी निरंतर प्रज्ज्वलित होकर पूरे परिसर को दिव्य प्रकाश से आलोकित कर रहे हैं। यह ज्योति कलश श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, विश्वास और मनोकामनाओं का प्रतीक बने हुए हैं।

रतनपुर की धार्मिक परंपरा के अनुसार मां महामाया के दर्शन के साथ नगर कोतवाल के रूप में पूजित भैरव बाबा मंदिर में दर्शन करना अनिवार्य माना जाता है। चौथे दिन यहां भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और भक्तों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर सुख-शांति की कामना कीकर रहे हैं

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट एवं जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण, स्वच्छता, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पुलिस बल की तैनाती और सुव्यवस्थित व्यवस्था के चलते श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन का लाभ मिल रहा है।

नवरात्रि के चौथे दिन रतनपुर में उमड़ी यह आस्था दर्शाती है कि मां महामाया और भैरव बाबा के प्रति भक्तों का विश्वास अटूट है। आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है।