कोरबा . हेलमेट और गिफ्ट का लालच देकर कोरबा जिले के कुछ इलाकों में दूसरे जिले की संस्थाएं ब्लड डोनेशन कैंप लगा रही है। नियम विरुद्ध तरीके से ऐसे आयोजन को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सख्ती दिखाई है। एक स्थान पर नोडल ऑफिसर ने पहुंचकर डोनेशन कैंप लगाने वाले को जमकर फटकार लगाई।
मानवता के हित में आपात समय में पीड़ितों को रक्त उपलब्ध कराना काफी अच्छा काम समझा जाता है। व्यक्ति और संस्थाओं को इस प्रकार के कार्यों के लिए कई अवसर पर सम्मानित भी किया जाता है। अब तो स्थिति यह है कि रक्त के नाम पर व्यवसाय शुरू कर दिया गया है। कोरबा जिले के कटघोरा और हरदी बाजार क्षेत्र में दूसरे जिले के निजी ब्लड बैंकों के द्वारा ब्लड डोनेशन कैंप लगाने का दुस्साहस किया गया। और तो और कई तरह के प्रलोभन देकर इस प्रकार के काम को अब निजी ब्लड बैंक वाले अंजाम देने में लगे हैं। जबकि नियमों के अंतर्गत इस तरह के शिविर आयोजित नहीं हो सकते। कोरबा में मेडिकल कॉलेज में संचालित ब्लड बैंक के नोडल ऑफिसर डॉक्टर आरकेएस राठौर ने बताया कि विशेष तौर पर दूसरे जिले के लोगों या ब्लड बैंक संस्थाओं को ऐसा कोई कार्यक्रम करने के लिए हमारे जिले के सीएमएचओ को आवेदन देकर अनुमति लेना ही होगा। नोडल ऑफिसर ने बताया कि एक स्थान पर बिना अनुमति के ब्लड डोनेशन कैंप लगाने और 60 यूनिट ब्लड इकट्ठा करने की सूचना मिली थी। आयोजकों से हमने इस बारे में न केवल जानकारी ली बल्कि जमकर फटकार लगाई।
ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी आसानी से रक्त उपलब्ध हो जाए इसके लिए अब आसपास के जिलों के कुछ ब्लड बैंकों की इकाइयों ने गजब को फंडा अपनाया है। बताया गया कि वे रक्तदाताओं को हेलमेट और दूसरी चीज गिफ्ट में देने की पेशकश भी करने लगे है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस तरह की हरकत बिल्कुल ना मंजूर है और ऐसा कोई नहीं कर सकता।
कोरबा जिले में इससे पहले ब्लड बैंक और दूसरे संगठनों की ओर से ब्लड डोनेशन कैंप लगाए गए हैं लेकिन इनके पीछे लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक करने और पीड़ितों की मदद करने की भावना रही है। लेकिन जिस तरह से दूसरे जिलों के ब्लड बैंक को की एंट्री कोरबा जिले में चोरी छुपे हो रही है और वह अपनी गलत गतिविधियां कर रहे हैं, उसे रोकने के लिए कठोर कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है।




