acn18.com नई दिल्ली/ सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आवारा कुत्तों के मुद्दे पर फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त के उस निर्देश पर रोक लगा दी है जिसमें कहा गया था कि जिन आवारा कुत्तों को पकड़ा गया है उन्हें छोड़ा नहीं जाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा- जिन कुत्तों को पकड़ा गया है उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद ही छोड़ा जाना चाहिए, सिवाय उन कुत्तों के जो रेबीज से संक्रमित हैं या जिनका व्यवहार आक्रामक है।
इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों को खाना खिलाना मना होगा। इसके लिए अलग से डेडिकेटेड फीडिंग जोन बनाए जाएं।
14 अगस्त को जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की स्पेशल बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने 11 अगस्त को डॉग बाइट्स और रेबीज के मामलों को देखते हुए सभी आवारा कुत्तों को 8 हफ्तों में दिल्ली-NCR के आवासीय क्षेत्रों से हटाकर शेल्टर होम में भेजने का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश, 3 पॉइंट
कोर्ट ने कहा कि नगर निगम को आदेश की धारा 12, 12.1 और 12.2 का पालन करना होगा। कुत्तों को पकड़कर उन्हें कीड़े मारने की दवा (डिवार्मिंग), टीकाकरण आदि करने के बाद उसी इलाके में छोड़ा जाए। लेकिन आक्रामक या रेबीज से पीड़ित कुत्तों को वापस नहीं छोड़ा जाएगा।
जस्टिस नाथ ने कहा कि सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों को खाना खिलाना मना होगा। इसके लिए अलग से डेडिकेटेड फीडिंग जोन बनाए जाएं। उन्होंने कहा कि कई घटनाएं गलत तरीके से खाना खिलाने के कारण हुई हैं।
कोर्ट ने पहले दिए गए आदेश (पैरा 13) को दोहराया और संशोधन किया कि कोई भी व्यक्ति या संस्था इन सेवाओं में बाधा नहीं डालेगी। साथ ही, डॉग लवर्स और NGOS को कोर्ट रजिस्ट्री में क्रमशः 25 हजार और 2 लाख रुपये जमा कराने होंगे।
SC के इस आदेश का बड़े स्तर पर विरोध हुआ। इसके बाद 13 अगस्त को चीफ जस्टिस बीआर गवई ने कहा था कि कॉन्फ्रेंस ऑफ ह्यूमन राइट्स (इंडिया) एनजीओ की याचिका पर कहा था कि वह खुद इस मामले पर गौर करेंगे। मामला 3 जजों की स्पेशल बेंच को सौंप दिया था।




