गेवरा-पेंड्रा के बीच बिछाई जा रही नई रेल लाने की कुछ पटरिया भी हुई नदारत……..?
सार्वजनिक क्षेत्र के वृहद उपक्रम कोल् इंडिया की अनुसांगिक कंपनी बिलासपुर के अधीन कोरबा-पश्चिम क्षेत्र में स्थापित और संचालित खुले मुहाने की गेवरा कोयला परियोजना अंचल से पेंड्रा को सीधे रेल लाइन से जोड़ने हेतु एक अति महत्त्वपूर्ण परियोजना का कार्य चल रहा हैं। अभी इन दिनों रेल लाइन बिछाने का काम निजी ठेकेदारों के माध्यम से कराया जा रहा हैं।
किंतु वहा आसपास निवासरत एक बड़ी आबादी उस समय हैरत में पड़ गयी, जब उन्होंने सुबह देखा की वहा बिछाई गयी नई रेल लाइन की कुछ लोहे की पटरिया ही गायब हैं। वहा बिखरे अवशेषों को देख आंकलन किया गया की लोहे की कुछ पटरी उसी हैरतजनक ढंग से गायब हो चुकी हैं, जिस सनसनीखेज ढंग से नहर पर बिछाया गया 40 फीट लंबा और 15 टन वजन का लोहे का पुल इसी हफ्ते हैरतजनक ढंग से रातो-रात गायब कर दिया गया। लगभग उसी तर्ज पर रेल लाईने भी सनसनीखेज ढंग से गायब हो चुकी हैं, इस हैरतजनक मामले का सही-सही आंकलन तो रेलवे के अधिकारी ही बता पाएंगे।
लगातार हो रही इन सनसनीखेज वारदातों में एक चिंताजनक कड़ी उस समय और जुड़ गयी जब कोरबा शहर वासियों को यह भी पता लगा की कोरबा शहर के मोतीसागर पारा मुक्तिधाम में स्थापित किये गए लाखो रूपए की लागत का इलेक्ट्रानिक पद्यति के शवदाह की मशीने और कलपुर्जे उखाड़ कर भी ले भाग चुके हैं। हालांकि इस पद्यति के शवदाह केंद्र को प्रारंभ भी नहीं किया जा सका।




