दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने एक बार फिर से माल ढुलाई में प्रथम स्थान अर्जित किया है। 355 दिन में रेलवे ने 29493 करोड रुपए की कमाई की है
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जो आंकड़े प्रस्तुत कर रहा है उसके अनुसार भारतीय रेलवे के कुल माल राजस्व में 17.13 प्रतिशत का योगदान उसका अकेले का है। पिछले साल से 1026 करोड रुपए अधिक कमाने वाले दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे प्रबंधन ने दावा किया है कि बेहतर मैनेजमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण यह संभव हुआ है साथ ही यह भी कहा जा रहा है की तीसरी चौथी रेल लाइन से माल परिवहन की क्षमता में वृद्धि हुई है
रिकॉर्ड बना लेने वाले अधिकारी भले ही इस उपलब्धि से गर्वित हो लेकिन कोरबा जिले की आवाम ऐसी उपलब्धि से खुश नहीं बल्कि नाराज होती है। कारण है रेल प्रबंधन द्वारा की जाने वाली उपेक्षा। सर्वाधिक आय देने वाले कोरबा को रेल सुविधा के नाम पर सिर्फ झुनझुना पकड़ा दिया गया है जब भी सुविधाओं में वृद्धि की बात होती है बहाने बाजी प्रारंभ हो जाती है
कुछ दिन पहले ही कोरबा सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत ने लोकसभा में कोरबा का पक्ष पूरी दमदारी से रखा था। उन्होंने कोरबा की की जा रही उपेक्षा पर रेल मंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया था। सदन में ही मौजूद रहे रेल मंत्री खामोश रहे उन्होंने कोरबा सांसद की मांग को सिर्फ सुना उस पर वह अमल करेंगे इसकी संभावना कदापि नहीं है। कुल मिलाकर कोरबा की जनता अपनी छाती से कोयला निकल कर उसे राष्ट्र निर्माण के लिए रेलवे के जरिए बाहर भेजती रहेंगी उसे सुविधाओं के नाम पर हमेशा सिर्फ और सिर्फ आश्वासन का लॉलीपॉप थमाया जाता रहेगा




