spot_img

कल से हो रही है पितृपक्ष की शुरुआत, जानें तर्पण विधि और श्राद्ध पक्ष की तिथियां

Must Read

Acn18.com/पितृपक्ष पितरों को समर्पित है। इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है। पंचांग के अनुसार पितृपक्ष की शुरुआत भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से होती है और अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर इसका समापन होता है। पितृपक्ष यानी श्राद्ध का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है। पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करके उनका श्राद्ध कर्म किया जाता है। पितृपक्ष में पितरों को तर्पण देने और श्राद्ध कर्म करने से उनको मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दौरान न केवल पितरों की मुक्ति के लिए श्राद्ध किया जाता है, बल्कि उनके प्रति अपना सम्मान प्रकट करने के लिए भी किया जाता है। पितृपक्ष में श्रद्धा पूर्वक अपने पूर्वजों को जल देने का विधान है। ऐसे में चलिए जानते हैं तर्पण विधि, नियम, सामग्री और मंत्र के बारे में…

- Advertisement -

कब से शुरू हो रहा है पितृपक्ष 2023 ?
पितृपक्ष की शुरुआत इस साल 29 सितंबर 2023 से हो रही है। इसका समापन 14 अक्तूबर को होगा।

दिनांक  दिन  तिथि/श्राद्ध
29 सितंबर 2023 शुक्रवार पूर्णिमा श्राद्ध
29 सितंबर 2023 शुक्रवार प्रतिपदा श्राद्ध
30 सितंबर 2023 शनिवार द्वितीया श्राद्ध
01 अक्तूबर 2023 रविवार तृतीया श्राद्ध
02 अक्तूबर 2023 सोमवार चतुर्थी श्राद्ध
03 अक्तूबर 2023 मंगलवार पंचमी श्राद्ध
04 अक्तूबर 2023 बुधवार षष्ठी श्राद्ध
05 अक्तूबर 2023 गुरुवार सप्तमी श्राद्ध
06 अक्तूबर 2023 शुक्रवार अष्टमी श्राद्ध
07 अक्तूबर 2023 शनिवार नवमी श्राद्ध
08 अक्तूबर 2023 रविवार दशमी श्राद्ध
09 अक्तूबर 2023 सोमवार एकादशी श्राद्ध
11 अक्तूबर 2023 बुधवार द्वादशी श्राद्ध
12 अक्तूबर 2023 गुरुवार त्रयोदशी श्राद्ध
13 अक्तूबर 2023 शुक्रवार चतुर्दशी श्राद्ध
14 अक्तूबर 2023 शनिवार सर्व पितृ अमावस्या

पितृपक्ष में तर्पण विधि
पितृपक्ष के दौरान प्रतिदिन पितरों के लिए तर्पण करना चाहिए। तर्पण के लिए आपको कुश, अक्षत्, जौ और काला तिल का उपयोग करना चाहिए। तर्पण करने के बाद पितरों से प्रार्थना करें और गलतियों के लिए क्षमा मांगें।

पितृपक्ष 2022 प्रार्थना मंत्र 

1- पितृभ्य:स्वधायिभ्य:स्वधा नम:।
पितामहेभ्य:स्वधायिभ्य:स्वधा नम:।
प्रपितामहेभ्य:स्वधायिभ्य:स्वधा नम:।
सर्व पितृभ्यो श्र्द्ध्या नमो नम:।।

2- ॐ नमो व :पितरो रसाय नमो व:
पितर: शोषाय नमो व:
पितरो जीवाय नमो व:
पीतर: स्वधायै नमो व:
पितर: पितरो नमो वो
गृहान्न: पितरो दत्त:सत्तो व:।।

पितृपक्ष में श्राद्ध कर्म करने वाले लोग बरतें ये सावधानी
पितृपक्ष में पितरों की आत्मा की शांति के लिए जो भी श्राद्ध कर्म करते हैं, उन्हें इस दौरान बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए। साथ ही इन दिनों में घर पर सात्विक भोजन ही बनाना चाहिए। तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए
पितृपक्ष का महत्व 
कहा जाता है कि पूर्वजों की तीन पीढ़ियों की आत्माएं पितृलोक में निवास करती हैं। पितृलोक स्वर्ग और पृथ्वी के बीच का स्थान माना जाता है। यह क्षेत्र मृत्यु के देवता यम द्वारा शासित है, जो एक मरते हुए व्यक्ति की आत्मा को पृथ्वी से पितृलोक तक ले जाता है। ऐसे में जब आप पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध कर्म करते हैं तो पितरों को मुक्ति मिलती है और वे स्वर्ग लोग में चले जाते हैं।
377FansLike
57FollowersFollow
377FansLike
57FollowersFollow
Latest News

सिविक सेंटर क्षेत्र में नगर निगम ने हटाया बेजाकब्जा,काफी समय से आसपास के लोग कर रहे थे इस पर आपत्ति

Acn18.com/नगर निगम के द्वारा कोरबा क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। अतिक्रमण उन्मूलन विभाग...

More Articles Like This

- Advertisement -