सरकारी अस्पतालों में रिजेंट की कमी के चलते पैथो लैब का काम प्रभावित, हाई कोर्ट ने CGMSC से मांगा जवाब, कोरबा सहित कई जिलों में खून की जांच है बंद
बिलासपुर। प्रदेश के कई जिलों के सरकारी अस्पतालों में रीजेंट की कमी के मामले में हाई कोर्ट ने CGMSC को दोबारा शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। इसमें बताना होगा कि रिजेंट की कमी किस तरह से दूर की जा रही है। इसके साथ ही पिछली बार CGMSC ने इसके लिए टेंडर करने की बात कही थी, उसमें क्या हुआ, इसकी जानकारी भी देनी होगी। राज्य शासन ने बताया है कि मार्केट से रिएजेंट की खरीदी की जा रही है।
बता दें कि सरकारी अस्पतालों, विशेष रूप से जिला अस्पताल, बिलासपुर में रिजेंट की कमी पर सुनवाई चल रही है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। इस दौरान CGMSC की ओर से अधिवक्ता ने बताया कि अब सीधे खुले बाजार से ही खरीदी हो रही है।
रिएजेंट की कमी के कारण कई सरकारी अस्पतालों के लैब में खून की जांच बंद होने से गरीब मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें मजबूरन निजी पैथालॉजी सेंटरों में जाकर जांच करवानी पड़ रही है, जो उनके लिए आर्थिक रूप से परेशानी भरा है।
बिलासपुर, बलौदाबाजार, कोरबा, दंतेवाड़ा, कवर्धा, गरियाबंद, मुंगेली, नारायणपुर, राजनांदगांव, सुकमा, बलरामपुर, और गौरेला पेंड्रा मरवाही सहित कई जिलों में रिजेंट किट की कमी के कारण खून की जांच बंद पड़ी हैं। मीडिया में प्रकाश में आये इस मामले में हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। इस अव्यवस्था पर हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कड़ी टिप्पणी की थी कि स्वास्थ्य विभाग में खरीदी गई लाखों की मशीनें सिर्फ रखने के लिए नहीं होनी चाहिए। इनसे जांच हो और नियमित समय पर रिपोर्ट मिले, इसकी व्यवस्था सरकार और स्वास्थ्य विभाग को करनी होगी। इस मामले में कोर्ट कमिश्नरों से भी जानकारी मांगी गई थी जिस पर उन्होंने कहा था कि, बायोकेमेस्ट्री मशीन और हार्मोनल एनालाइजर मशीन के लिए रिजेंट की कमी है।
घोटाले के बाद बदली परिस्थितियां
गौरतलब है कि पूर्व में CGMASC में रीजेंट और अन्य सामग्रियों की खरीदी में हुए करोड़ों के घोटाले का मामला उजागर हुआ था। तब उन अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में भी रीजेंट खपा दिया गया था जहां इसकी जरुरत ही नहीं पड़ती। इस मामले की जांच हुई और कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं। अब हालात ये हैं कि CGMSC द्वारा रीजेंट और अन्य सामग्रियों की समय पर खरीदी में रूचि नहीं दिखाई जा रही है जिसके चलती अस्पतालों के लैब में ब्लड जांच प्रभावित हो रहे हैं या फिर बंद हो गए हैं।




