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तेवड़ा चर्च के पादरी की घर वापसी.कहा की धर्मांतरण के लिए किया जाता है भयभीत

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छत्तीसगढ़ . छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में धर्मांतरण कराने वालों का साथ देने वाला पादरी विजय बघेल कि घर वापसी हो गई है। विजय ने बताया की आम बेड़ा में आदिवासी समुदाय के मध्य जो बवाल हुआ उसके पीछे ईसाई मिशनरी और भीम आर्मी के लोग थे। विजय बघेल ने बताया की जो लोग इलाज के नाम पर प्रार्थना सभा में जाते हैं उन्हें थोड़ा भी लाभ मिलता है तो यह कहकर उन्हें धर्मांतरित कराया जाता है यदि वापस अपने मूल धर्म में जाओगे तो फिर बीमार पड़ जाओगे

विजय बघेल 3 वर्ष पहले धर्मांतरण कर ईसाई धर्म को स्वीकार कर चुका था उसकी सक्रियता को ध्यान में रखते हुए मिशनरी के लोगों ने इसे तेवड़ा चर्च का प्रमुख बना दिया था। अब विजय बघेल मिशनरी की गतिविधियो से रुष्ट होकर सनातन धर्म में वापस लौट आया। घर वापसी के बाद विजय ने बताया की बीमारी के बाद जो लोग प्रार्थना सभा में आते हैं और थोड़ा भी फायदा उन्हें मिलता है तो उन्हें यह कहकर डराया जाता है कि यदि घर वापसी करोगे तो फिर बीमार पड़ जाओगे।जिससे डर कर लोग ईसाई धर्म को ही मानने लगते हैं। विजय ने बताया कि उसके गांव के लगभग दो दर्जन परिवार धर्मांतरित हो गए हैं जिसमें से कुछ परिवार वापस लौटना चाहते हैं ।

पिछले सप्ताह आमांबेड़ा के तेवड़ा चर्च के पास ही विवाद हुआ था। यहां के लोगों ने एक धर्मांतरित आदिवासी परिवार के सदस्य की मौत के बाद उसे अपने श्मशान घाट में अंतिम संस्कार करने से रोक दिया। कहा गया कि आदिवासी परंपरा के अनुसार कफन दफन करने पर उन्हें रोक नहीं जाएगा लेकिन सामने वाले नहीं माने जिसके कारण यह घटना घटी विजय बघेल ने बताया की घटना दिनांक को ईसाई मिशनरी और भीम आर्मी के लोगों ने मिलकर आदिवासियों के साथ मारपीट किया था योजना बद्ध तरीके से हिंदुओं को ईसाई बनाने का खेल वर्षों से चल रहा है अब इस खेल को लोग समझने लगे हैं। आदिवासी समाज में धर्मांतरण के विरुद्ध जो जागृति आई है उसका ही परिणाम है अब वह मुखर होकर सनातन धर्म के विरुद्ध चल रहे अभियान का विरोध करने लगे हैं। इसी जागृति का ही परिणाम है विजय बघेल कि घर वापसी

यहां यह बताना भी प्रासंगिक होगा की आमांखेड़ा में आदिवासी समाज पर मिशनरी के लोगों का आक्रमण चर्चा और आक्रोश का कारण बन गया है। सर्व समाज द्वारा 24 दिसंबर बुधवार को छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया गया है