
कोरबा .प्रशासन की कड़ाई के बाद सहकारी समिति कर्मचारी संघ की हड़ताल खत्म हो गई है और कर्मचारी धान की खरीदी करने के लिए वापस आ गए हैं। धान खरीदी के साथ विभिन्न केंद्रों में निरीक्षण भी शुरू हो गया है। यहां पर अधिकारी अलग राग अलाप रहे हैं जबकि किसानों का कहना है कि उन्हें फिजूल में ही परेशान किया जा रहा है।
कोरबा जिले के भैंसमा समिति के अंतर्गत उपार्जन केंद्रों में धान क्रय करने का काम शुरू हो गया है। सीमित संख्या में किसानो को टोकन जारी किए गए हैं। इसके हिसाब से अनाज उत्पादन करने वाला वर्ग खरीफ सीजन की फसल लेकर यहां पहुंच रहा है। ग्रामीण क्षेत्र से पहुंचे एक कृषक ने बताया कि वह दो एकड़ जमीन का मालिक है और इतने हिस्से में धान की पैदावार की गई। अब किराए की व्यवस्था से अपनी पैदावार बेचने के लिए यहां तक पहुंच बनाई गई है , तब उसे कहां जाना है कि उपज पुराना है।
भैंसमा तहसीलदार के के लहरे यहां निरीक्षण के लिए पहुंचे। उन्होंने व्यवस्था को देखने के बाद मीडिया से बातचीत की। तहसीलदार ने बताया कि प्रशासन के द्वारा कोरबा जिले में धान उपार्जन की बेहतर व्यवस्था की गई है। हमने तय किया है कि सबसे पहले पैदावार की आद्रता मशीन से की जाएगी। इसके आधार पर ही धान को खरीदी की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। केरवादवारी समिति में भी सीमित किसानों को टोकन जारी किए गए हैं। प्रबंधक ने बताया कि इसके हिसाब से खरीदी की जाएगी। जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 26 के लिए कोरबा जिले में 65 स्थान पर कृषक समुदाय की धान की खरीदी की जानी है। लगभग 56000 कृषक ने अपना पंजीकरण खरीफ फसल बेचने के लिए कराया है। त्रिस्तरी व्यवस्था के अंतर्गत खरीदी का काम किया जाना है कोरबा जिले को सरकार से 30 लाख बैटरी टन धान खरीदने का लक्ष्य प्राप्त हुआ है जिसे 31 जनवरी तक पूरा करना है।




