कहीं अच्छी, कहीं औसत पैदावार हुई है खरीफ सीजन की धान की .15 नवंबर से धान उपार्जन इसलिए कटाई में तेजी

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छत्तीसगढ़ . सरकार ने छत्तीसगढ़ में विभिन्न प्रकार के अनाज की खरीदी के लिए समर्थन मूल्य की घोषणा पहले ही कर दी है। कोरबा जिले की 49 समितियों में 15 नवंबर से खरीफ सीजन की धान की खरीदी होना है। इसके लिए समिति स्तर पर प्राथमिक तैयारी कर ली गई है। इधर विभिन्न ग्रामों में धान की कटाई का काम धीरे-धीरे जोर पकड़ रहा है। कुछ इलाकों में किसानों की आशा पूरी हुई है तो कहीं पर बहुत कुछ अधूरापन बना हुआ है।

धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में लगभग पूरे हिस्से में मुख्य फसल धान ही है। कोरबा की पहचान बेशक औद्योगिक जिले के रूप में है लेकिन इसके बावजूद अभी भी 2 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर खेती की जा रही है। डेढ़ लाख के लगभग किसानों ने अपने खेतों में उत्पादित धान की पैदावार को बेचने के लिए नियमों के अंतर्गत पंजीकरण कराया है। कोरबा जिले में 65 स्थान पर धान की खरीदी करने की व्यवस्था प्रशासन की ओर से कराई गई है। 15 नवंबर से किसान अपनी पैदावार लेकर इन जगहों पर पहुंचेंगे और उसकी बिक्री करेंगे। इसलिए अब कोरबा के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के द्वारा खेतों में पक चुकी धान की फसल की कटाई शुरू कर दी गई है। कई खेतों में इनके गठ्ठर नजर आ रहे हैं। एक गांव के खेत में हमें कुछ किस काम करते नजर आए। उनसे पूछताछ की गई और इस वर्ष की खेती का हाल-चाल जाना गया। किसानों का जवाब था फसल अच्छी हुई है लेकिन हर तरफ एक जैसा दृश्य नहीं है।

भारत के संदर्भ में पिछले कई वर्षों तक खेती को मानसून का जुआ कहा जाता रहा। इसका मतलब यह था कि अगर मानसून ने साथ दिया तो खेती में लाभ हो सकता है वरना आपकी लागत भी डूब सकती है और नुकसान होना पक्का है। इसलिए किसानों ने समय के साथ अपने आप को बदलने की मानसिकता बनाई। किसी ने विकल्प बदला तो किसी ने संसाधनों की व्यवस्था की। किसानों का मानना है कि समय के साथ जरूरी परिवर्तन नहीं करने से स्थितियां नहीं सुधर सकती।