अब महासमुंद जिले में शॉर्टेज हुआ 5.71 करोड़ रुपए का धान, प्रभारी ने बताया– चूहे, चिड़िया और दीमक खा गए धान, सूखत का भी पड़ा असर
महासमुंद। कवर्धा जिले के बाद अब महासमुंद जिले में भी करोड़ों रूपये के धान का शॉर्टेज हुआ है। हालांकि ये पिछले साल के धान में आई कमी का आंकड़ा है और प्रभारी का कहना है कि उठाव में महीनों की देरी के चलते धान काफी मात्रा में सूख गया। वहीं चूहे, चिड़िया और दीमक भी धान खा गए हैं।
यह मामला महासमुंद जिले के बागबाहरा स्थित धान संग्रहण केंद्र का है। जहां के प्रभारी दिपेश कुमार पाण्डेय को 2024–25 में किसानों से खरीदे गए धान में शॉर्टेज होने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
दरअसल संग्रहण केंद्र में रखे पिछले साल के धान के स्टाॅक में करीब 18 हजार 433 क्विंटल धान का शॉर्टेज मिला है। जिसकी कीमत 5 करोड़ 71 लाख रूपये आंकी जा रही है। संग्रहण केंद्र में करोड़ों रूपये के धान शॉर्टेज को लेकर एक बार फिर अधिकारी इस कमी की जिम्मेदारी सूखत के साथ ही चूहे, कीट, चिढ़िया पर डाल रहे हैं।
इस पूरे मामले को लेकर बागबाहरा धान संग्रहण प्रभारी अलग ही दलील दे रहे है। उन्होने बताया कि साल 2024-25 में 12.63 लाख बोरा धान संग्रहण केंद्र में आया था। आवक के वक्त 17 प्रतिशत नमी वाला धान लिया गया। जबकि जावक के समय 10.11 प्रतिशत नमी रही। संग्रहण केंद्र प्रभारी ने सूखत के अलावा धान की कमी का मुख्य कारण संग्रहण केंद्र में दीमक, कीट, पंछी और चूहों को बताया, जो कि धान खा जाते हैं।
बागबहरा धान संग्रहण केंद्र प्रभारी के दावों को अगर सच माना जाये तो फिर चूहे, चिड़ियां और कीट ये सभी जीव 10 महीने तक बिना रुके लगातार हर घंटे करीब 256 किलो धान खा रहे थे। जिसकी वजह से सरकार को 5.71 करोड़ रुपए का सीधे तौर पर नुकसान हुआ, लेकिन संचालकों के इन सारे दावों से परे हकीकत कुछ और ही नजर आती है। कीट, जानवरों, सीपेज और शॉर्टेज से इतर यह भ्रष्टाचार का मामला ज्यादा लग रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि संग्रहण केंद्रों में धान के उचित रखरखाव के लिए प्रशासन मार्कफेड के जरिए हर साल करोड़ों रुपए खर्च करती है। इसमें परिवहन भाड़ा और हमाली के अलावा सुरक्षा के लिए जरूरी उपकरणों का खर्च भी शामिल रहता हैं।
बता दें कि खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की ओर से सचिव ने 12 सितंबर 2025 को एक पत्र जारी किया था। जिसमें ये स्पष्ट किया गया था कि धान संग्रहण केंद्र के स्टॉक में 1 फीसदी की कमी आने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए, वहीं 1 से 2 प्रतिशत की कमी आने पर विभागीय जांच और 2 प्रतिशत से ज्यादा कमी आने पर तत्काल निलंबन और विभागीय जांच के साथ ही एफआईआर के निर्देश दिये थे।
बागबहरा के संग्रहण केंद्र की बात करें तो यहां 3.65 प्रतिशत धान की कमी दर्ज की गयी। बावजूद इसके अब तक जवाबदार अधिकारियों ने इस पूरे मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। उधर करोड़ों रूपये के धान शाॅर्टेज के इस मामले को लेकर जिला प्रशासन भी अब तक गंभीर नजर नही आ रहा है। इस मामले पर मीडिया ने जब महासमुंद कलेक्टर विनय लंगेह से पूछा, तो उन्होने इस मामले की कोई भी जानकारी नहीं होेने की बात कही। कलेक्टर ने बताया कि वे इस मामले की जानकारी मार्कफेड के डीएमओ से लेंगे और अगर गड़बड़ी मिलती है या मामला बनता है, तो नियमों के अनुसार निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी।
DMO ने नियमों के तहत कार्यवाही की बात कही
इस मामले में महासमुंद के जिला विपणन अधिकारी का कहना है कि बागबाहरा संग्रहण केंद्र में 3.65 प्रतिशत शॉर्टेज आया है। प्रभारी को विभाग की तरफ से नोटिस जारी किया गया है। खाद्य संचालनालय के सचिव की ओर से इस संबंध में जो पत्र जारी किया गया था, उसी के तहत नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।




