विशेष समाचार : *राष्ट्रीय किसान नेतृत्व का कोंडागांव की ओर रुख, ‘मां दंतेश्वरी हर्बल समूह’ बना प्राकृतिक खेती का उभरता राष्ट्रीय मंच,*
मुख्य बिंदु :-
▣ देश के तीन प्रमुख किसान संगठनों के शीर्ष नेताओं ने समूह की सदस्यता ग्रहण की
▣ प्राकृतिक खेती, किसान आय वृद्धि और टिकाऊ कृषि मॉडल पर गंभीर मंथन,
▣ MDBP-16 काली मिर्च व नेचुरल ग्रीनहाउस मॉडल ने खींचा राष्ट्रीय ध्यान,
▣ लाखों किसानों से जुड़े संगठनों का सकारात्मक कृषि दिशा की ओर कदम
▣ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय जैविक उत्पादों की पहचान मजबूत करने पर जोर
▣ अनुभवी किसान नेताओं ने मॉडल को बताया किसानों के भविष्य का व्यवहारिक समाधान,
कोंडागांव, छत्तीसगढ़। प्राकृतिक खेती और किसान आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में कार्यरत मां दंतेश्वरी हर्बल समूह के लिए आज का दिन ऐतिहासिक माना जा रहा है, जब देश के तीन अग्रणी किसान संगठनों के शीर्ष नेतृत्व ने विधिवत रूप से समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। दिल्ली और हरियाणा से लंबी यात्रा कर राष्ट्रीय किसान संगठन हरियाणा के अध्यक्ष भाई जसबीर सिंह भाटी, भारतीय किसान मजदूर उत्थान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भाई सुखदेव सिंह विर्क, ग्राम स्वराज किसान मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक भाई मनोज सहरावत दरवेश तथा सह संयोजक भाई अतरसिंह कोंडागांव स्थित मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म एवं रिसर्च सेंटर पहुंचे और पूरे दिन यहां संचालित प्राकृतिक एवं हर्बल कृषि गतिविधियों का गहन अवलोकन किया।
किसान नेताओं ने विशेष रूप से नेचुरल तरीके से विकसित हर्बल खेती मॉडल, उच्च उत्पादकता वाली काली मिर्च की गेम चेंजर किस्म MDBP-16, हल्दी उत्पादन प्रणाली तथा कम लागत वाले “नेचुरल ग्रीनहाउस मॉडल” का व्यावहारिक अध्ययन किया और इसके आर्थिक पक्ष को समझते हुए इसे किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक व्यवहारिक समाधान बताया। उल्लेखनीय है कि यह मॉडल पारंपरिक महंगे पॉलीहाउस के विकल्प के रूप में विकसित किया गया है, जो कम लागत में टिकाऊ उत्पादन की संभावना प्रस्तुत करता है।
सबसे महत्वपूर्ण क्षण तब आया जब इन राष्ट्रीय किसान नेताओं ने मां दंतेश्वरी हर्बल समूह की सदस्यता ग्रहण कर संस्था के कार्यों के प्रति विश्वास व्यक्त किया। इसे केवल कोंडागांव या छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि देशभर में प्राकृतिक खेती आंदोलन के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। किसान संगठनों से जुड़े लाखों किसानों के इस मंच से जुड़ने को जैविक खेती, किसान आय वृद्धि और भारतीय कृषि उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में साख मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
विशेष उल्लेखनीय यह रहा कि किसान नेताओं ने पूरा दिन किसान संगठनों के पारंपरिक एजेंडे से इतर टिकाऊ कृषि व्यवस्था, जैविक खेती के विस्तार, पर्यावरण संरक्षण और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के व्यावहारिक उपायों पर गंभीर विचार मंथन में व्यतीत किया। लंबे समय से जैविक एवं हर्बल खेती के समर्थक रहे भाई जसबीर सिंह भाटी तथा भाई मनोज सहरावत दरवेश स्वयं अनुभवी जैविक किसान हैं और दशकों से डॉ. राजाराम त्रिपाठी द्वारा विकसित कृषि नवाचारों से प्रभावित रहे हैं। लगभग 80 वर्ष की आयु में भी भाई जसबीर सिंह भाटी युवा ऊर्जा के साथ खेती और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के अभियान में सक्रिय हैं।
बस्तर में ‘मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म एवं रिसर्च सेंटर’ में चल रही गतिविधियों की विस्तृत जानकारी समूह की अध्यक्ष दशमति नेताम, निर्देशक अनुराग त्रिपाठी, शंकर नाग तथा कृष्णा नेताम आदि के द्वारा किसान नेताओं को दी गई। इस अवसर पर प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय स्तर पर संगठित रूप देने, किसानों को बाजार से जोड़ने तथा सकारात्मक कृषि आंदोलन को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि किसान संगठनों का यह जुड़ाव संकेत देता है कि देश में किसान आंदोलन अब केवल विरोध की राजनीति तक सीमित न रहकर समाधान आधारित, टिकाऊ और बाजार उन्मुख कृषि मॉडल की ओर बढ़ रहा है, जिसमें प्राकृतिक खेती और हर्बल, मसाले,श्रीअन्न, सुपरफूड जैसे भारी मांग वाली उच्च मूल्य कृषि उत्पादों की खेती देश के कृषि भविष्य की केंद्रीय धुरी बन सकती है।




