विशेष खबर : *बस्तर में ‘ब्लैक गोल्ड’ की दस्तक: आदिवासी किसान रसन लाल ने तोड़ी पहली काली मिर्च की फसल,*
(नक्सलवाद के बाद बदलते बस्तर की नई तस्वीर)
*(बाक्स )आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कदम:-*
*◼ 10 वर्षों से मिशन ब्लैक गोल्ड’ के तहत 25,000 से अधिक पौधे निशुल्क वितरित,*
*◼ पहली बार नहीं, कई गांवों में पहले से सफल काली मिर्च उत्पादन,*
*◼ फसल की तत्काल खरीदी और नगद भुगतान से बढ़ा किसानों का भरोसा,*
*◼ आगामी मानसून में मिशन के बड़े विस्तार की तैयारी,*
कोंडागांव(बस्तर)छग: बस्तर अंचल में आदिवासी किसानों के बीच आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी जा रही है। कोंडागांव से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित एक गांव के युवा आदिवासी किसान रसन लाल कोर्राम ने हाल ही में अपनी पहली काली मिर्च की फसल लेकर यह साबित कर दिया है कि सही मार्गदर्शन और स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव है।
कुछ वर्ष पूर्व ‘मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म एवं रिसर्च सेंटर’ द्वारा विकसित उच्च उत्पादक किस्म “मां दंतेश्वरी काली मिर्च-16 (MDBP-16)” के पौधे उन्हें निशुल्क उपलब्ध कराए गए थे। इन पौधों को उनके घर के पीछे स्थित बाड़ी में पहले से मौजूद साल (सरगी) के पेड़ों के तनों के पास लगाया गया। प्रारंभ में पर्याप्त ध्यान न देने के कारण कुछ पौधे नष्ट हो गए, किन्तु शेष पौधों ने धीरे-धीरे विकास करते हुए अब फल देना शुरू कर दिया है।
हाल ही में रसन लाल कोंडागांव आकर काली मिर्च की उन्नत harvesting एवं संग्रहण तकनीक को समझकर गए थे। इसके बाद उन्होंने अपनी पहली उपज लगभग 7 किलोग्राम काली मिर्च ‘मां दंतेश्वरी हर्बल समूह’ को सौंपी। समूह द्वारा तौल कर तत्काल नगद भुगतान किए जाने से उनके मन में विश्वास और उत्साह दोनों का संचार हुआ। इसी दौरान उन्होंने मात्र 10 रुपये की सदस्यता लेकर समूह से औपचारिक रूप से जुड़ाव भी स्थापित किया।
रसन लाल अब आगामी मानसून में अपनी पारंपरिक खेती के साथ-साथ अश्वगंधा, केवांच एवं अन्य औषधीय फसलों की खेती की तैयारी कर रहे हैं।
गौरतलब है कि डॉ राजाराम त्रिपाठी द्वारा लगभग तीन दशक पूर्व स्थापित गैर सरकारी समाजसेवी संस्था
‘मां दंतेश्वरी हर्बल समूह’ द्वारा पिछले लगभग एक दशक से ‘मिशन ब्लैक गोल्ड मिशन’ के तहत बस्तर अंचल के छोटे और सीमांत आदिवासी किसानों को काली मिर्च की उन्नत किस्म के पौधे पूरी तरह निशुल्क वितरित किए जा रहे हैं। न केवल पौधे दिए जाते हैं, बल्कि किसानों के घरों के समीप स्थित बाड़ियों में पहले से मौजूद आम, महुआ, इमली एवं साल जैसे पेड़ों के तनों के पास इन्हें लगवाकर, बेल को पेड़ों पर चढ़ाने तक का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
इस योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 25,000 से अधिक काली मिर्च के पौधे विभिन्न गांवों में वितरित किए जा चुके हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। कई गांवों के किसान सफलतापूर्वक काली मिर्च का उत्पादन कर रहे हैं और स्थानीय स्तर पर इसकी उपलब्धता तेजी से बढ़ रही है। समूह द्वारा किसानों को फसल की तत्काल खरीदी और विपणन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
इसी प्रकार, पिछले 10 वर्षों से ‘मिशन सिंदूरी’ अभियान के अंतर्गत भी 20,000 से अधिक पौधों का निशुल्क वितरण किया जा चुका है।
यह दोनों अभियान स्थानीय युवाओं शंकर नाग, कृष्णा नेताम, सोमन बघेल एवं घनश्याम नाग के सक्रिय सहयोग से संचालित हो रहे हैं, जिनका मार्गदर्शन समूह की अध्यक्ष दसमती नेताम एवं निदेशक अनुराग कुमार द्वारा किया जा रहा है।
विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि बस्तर के विभिन्न गांवों जैसे माकड़ी विकासखंड के काटागांव, जड़कोंगा, कोंडागांव के मसोरा, जोंधरापदर, जगदलपुर जिले के किनारे, राजनगर एवं परपा में भी पिछले कुछ वर्षों से आदिवासी किसान काली मिर्च की खेती सफलतापूर्वक कर रहे हैं और वहां नियमित उत्पादन प्राप्त हो रहा है।
समूह से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष बस्तर के आदिवासी किसानों, विशेषकर युवाओं में इन योजनाओं के प्रति अभूतपूर्व उत्साह देखा गया है। आगामी मानसून में ‘मिशन ब्लैक गोल्ड’ और ‘मिशन सिंदूरी’ दोनों अभियानों का व्यापक विस्तार किए जाने की योजना है।
बस्तर में धीरे-धीरे आकार ले रही यह पहल यह संकेत देती है कि छोटे प्रयास भी जब सामूहिकता और निरंतरता से जुड़े हों, तो वे बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।
*द्वारा प्रेस कार्यालय : मां दंतेश्वरी हर्बल समूह कोंडागांव बस्तर छत्तीसगढ़,*




