नक्सलियों के लिए कॉल बने भारतीय सेना के लाल, नक्सली प्रभावित इलाकों को करा रहे हैं मुक्त

0
48

Acn18.com/ जगदलपुर,छत्तीसगढ़ | इन दिनों बस्तर के डीआरजी नक्सलियो के लिए काल बन गई .जो नक्सलियों के मांद में घुसकर उनके शीर्ष नेता बसवराजू को मार गिराने वाले जिला रिजर्व गार्ड अर्थात डीआरजी के बारे में लोगों की राष्ट्रीय स्तर पर जिज्ञासा जागृत हो गई है, नारायणपुर जिले में 546 डीआरजी के जवान तैनात हैं, जिसमें 462 पुरुष एवं 84 महिलाएं शामिल हैं। अब तक बस्तर को लाल लडाकों से मुक्त करने के लिए 18 डीआरजी के जवान शहीद हो चुके हैं, डीआरजी के शौर्य के परिणामों से अब बस्तर अंचल से नक्सलियों के पांव उखड़ने लगे हैं।

बता दे कि सबसे पहले कांकेर और नारायणपुर जिलों में नक्सल विरोधी अभियान में डीआरजी को वर्ष 2008 में शामिल किया गया था। वर्ष 2013 में बीजापुर और बस्तर जिले में इसका गठन किया गया। 2014 में सुकमा और कोंडागांव के बाद 2015 में दंतेवाड़ा जिले में यह अस्तित्व में आया। डीआरजी जवान नक्सलियों के सबसे बड़े दुश्मन माने जाते हैं।

अबूझमाड़ के बीहडों, घने खतरनाक जंगलों में, डीआरजी के जवान रात भर 30 से अधिक किलोमीटर पैदल चलते हैं, आईईडी, स्पाइक होल औरनदियों से भरे जंगलों को साहस के साथ पर करते है 10 लाख बस्तर के आदिवासियों की उम्मीद उनके कंधों पर सवार है डीआरजी जवान ऑपरेशन 3 से 5 दिनों तक 90 से 120 किलोमीटर की दूरी तय करता है जो कोई लोग को असंभव लगता है वह डीआरजी के लिए नियमित है आपको ये भी बता दे डीआरजी में 20 प्रतिशत महिला युद्धा है जो बस्तर की महिला योद्धा रूढ़ियों को तोड़ रही है और नक्सली नेताओ को चौका रहा है