विकसित भारत में अभी भी कावड़ में ढोए जा रहे हैं मरीज
पहुंचविहीन गांव से मरीज को सड़क तक लाने की मशक्कत
देखिए वीडियो
विकसित भारत का राजनेताओं को गुमान है लेकिन देश की वास्तविक तस्वीर गांव में दिखाई देती है। ऐसे ही एक तस्वीर छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से सामने आई ।पहुंच विहीन क्षेत्र में बीमार एक युवक की मौत के बाद उसके शव को कावड़ के जरिए ढोकर कई किलोमीटर तक लाना पड़ा
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सीतापुर थाना क्षेत्र में आने वाले गांव लकड़ा लता के तालाब में एक युवक की डूबने से मौत हो गई। सुरेंद्र तिर्की की लाश को परिजनों ने मुख्य मार्ग तक लाने के लिए कावड़ का सहारा लिया।
कई किलोमीटर तक परिजन सुरेंद्र की लाश लेकर पदयात्रा करते हुए मुख्य मार्ग पर पहुंचे तब जाकर उन्हें शव वाहन का आश्रय मिला. उन्हें ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि सुरेंद्र की मौत डूबने से हुई थी इसलिए उसका पोस्टमार्टम कराना जरूरी था. जहां पोस्टमार्टम होना था वहां तक जाने के लिए गांव में सड़क नहीं थी इसलिए परिजनों को कावड़ का सहारा लेना पड़ा.
जब भारत दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था बन जाने का दंभ कर रहा हो ऐसे कालखंड में मृतक की खाट को कावड़ की तरह उपयोग करने की बाध्यता दर्शाती है की कस्बा भले शहर बन गया हो, शहर भले महानगर बनने की ओर अग्रसर हो लेकिन गांव आज भी सदियों पुरानी मुश्किलों को झेल रहा है




