बड़ेडोंगर वन परिक्षेत्र में साल सहित बहुमूल्य पेड़ों की अवैध कटाई, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने मिलीभगत का लगाया आरोप

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कोंडागांव।  जिले के बड़ेडोंगर वन परिक्षेत्र में लकड़ी तस्करों की सक्रियता से वनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बड़गई ग्राम से लगे वन क्रमांक 1211 में साल प्रजाति सहित अन्य बहुमूल्य पेड़ों की बड़े पैमाने पर अवैध कटाई सामने आई है। वन संरक्षण के नाम पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था कमजोर नजर आ रही है।

ग्रामीणों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि बड़गई ही नहीं, बल्कि आसपास के कई वन क्षेत्रों में लगातार पेड़ों की कटाई हो रही है। कटे हुए साल, करंज, जामुन और सेमल प्रजाति की लकड़ियों को ट्रकों में लोड कर लकड़ी उद्योगों तक पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रतिदिन कई ट्रकों के माध्यम से लकड़ियों का परिवहन किया जा रहा है, जो बिना विभागीय जानकारी के संभव नहीं है।

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स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि लकड़ी तस्कर वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों को निर्धारित राशि देकर अवैध कटाई को अंजाम दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई संभव नहीं है। हालांकि वन विभाग का मैदानी अमला कार्रवाई की बात कह रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अधिकृत बयान देने से बचते नजर आ रहे हैं।
वनरक्षक रतन नेताम और डिप्टी रेंजर मोहन पुजारी ने प्रकरण दर्ज करने की बात कही, लेकिन जब्त की गई लकड़ियों की मात्रा और कार्रवाई के विस्तृत विवरण को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाए। इससे पूरे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है।

इस संबंध में केशकाल की वन मंडलाधिकारी दिव्या गौतम ने बताया कि मामले की जांच एसडीओ स्तर के अधिकारी से कराई जाएगी। जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

वन क्षेत्र में लगातार हो रही अवैध कटाई ने वन संरक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब देखना होगा कि जांच के बाद विभाग दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है और वनों की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।