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रजत जयंती पर्व में हरी-भरी पहल

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असनींद से बरबसपुर तक वन संरक्षण और जागरूकता के विविध कार्यक्रम

रायपुर, 4 दिसंबर 2025

असनींद से बरबसपुर तक वन संरक्षण और जागरूकता के विविध कार्यक्रम

रजत जयंती पर्व के अवसर पर बलौदाबाजार जिले में वन विभाग द्वारा श्रृंखलाबद्ध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, जैव-विविधता संवर्धन और स्थानीय समुदायों में जागरूकता बढ़ाना रहा।

असनींद में “वन हर्बल उत्सव”

वन परिक्षेत्र सोनाखान अंतर्गत ग्राम असनींद के बजरंग चौक में “वन हर्बल उत्सव” का आयोजन किया गया। वन परिक्षेत्र अधिकारी  एवं उनकी टीम ने ग्रामीणों को औषधीय पौधों की पहचान, उनके उपयोग, तेंदूपत्ता तथा अन्य लघु वनोपज के संग्रहण, प्रक्रिया और समर्थन मूल्य पर खरीद से संबंधित विस्तृत जानकारी दी। इसके साथ ही जन-हितैषी योजनाओं से भी अवगत कराया।

कृष्ण कुंज, बलौदाबाजार में वृक्षारोपण

जनप्रतिनिधि, स्कूली छात्राएँ और शिक्षक बड़ी संख्या में कृष्ण कुंज में आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम में शामिल हुए। उप वनमण्डलाधिकारी ने पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संतुलन, किसान वृक्ष मित्र योजना और वृक्षों के महत्व पर प्रेरक संदेश दिया।

स्वामी आत्मानंद स्कूल में रंगोली प्रतियोगिता

रजत जयंती पर्व के तहत स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यमिक स्कूल, बलौदाबाजार में रंगोली प्रतियोगिता आयोजित की गई। विद्यार्थियों ने “वन एवं पर्यावरण संतुलन”, “जैव विविधता”, “ग्लोबल वार्मिंग” और “वन संरक्षण में सूचना प्रौद्योगिकी” जैसे विषयों पर आकर्षक रंगोली कृतियाँ बनाईं। कार्यक्रम में वन विभाग के संबंधित अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

डाढ़ाखार में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान

शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला डाढ़ाखार में वन परिक्षेत्र अधिकारी बल्दाकछार के नेतृत्व में वृक्षारोपण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इसमें सरपंच, वन प्रबंधन समिति अध्यक्ष,शिक्षक और ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने पर्यावरण संरक्षण और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के सम्मान का संदेश दिया।

बरबसपुर में पक्षी महोत्सव

वन परिक्षेत्र बल्दाकछार के ग्राम बरबसपुर में आयोजित “पक्षी महोत्सव” में स्थानीय बाँध में पाई जाने वाली पक्षी प्रजातियों की जानकारी दी गई। वन प्रबंधन समिति अध्यक्ष एवं ग्रामीणों को पक्षी संरक्षण की अहमियत से अवगत कराया गया। रजत जयंती पर्व पर आयोजित ये सभी कार्यक्रम पर्यावरणीय जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता को सशक्त बनाने की दिशा में सराहनीय पहल साबित हुए।