पहाड़ी कोरवा समुदाय के सरकारी कर्मचारी ने आत्महत्या की , 2 माह से नहीं जा रहा था स्कूल मृतक

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acn18.com कोरबा/ विशेष जनजातियों के संरक्षण की जिम्मेदारी भारत सरकार ने ली है और उन्हें राष्ट्रपति की दत्तक संतान का दर्जा भी दिया गया है। पहाड़ी कोरवा समुदाय इसी का एक संवर्ग है जिससे जुड़े एक सरकारी कर्मचारी ने फांसी लगाकर जान दे दी। इस घटना के पीछे शराब को सबसे मुख्य कारण बताया जा रहा है। बालको नगर पुलिस ने मर्ग कायम करने के साथ आगे कार्रवाई करने की बात की है।

कोरबा जिले में पहाड़ी कोरवा, पंडो, धनुहार और बैगा जनजातियों को संरक्षित श्रेणी में रखा गया है और इनके हितों की चिंता करने के लिए सरकार कई स्तर पर कोशिश कर रही है। जिला स्तर पर आदिवासी विकास और परियोजना प्रशासन विभाग ऐसे मामलों में सीधे तौर पर नजर रखे हुए हैं। संरक्षित जनजातियों से जुड़ी योजनाएं इन्हीं विभागों की देखरेख में संचालित होती हैं ताकि उनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाए जा सके। ईन जातियों से जुड़े लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है और सरकारी नौकरी का लाभ भी दिया जाना जारी है। पहले सरकारी सेवा में आए पहाड़ी कोरबा भरत लाल ने गलत प्रवृत्तियों के चलते खुदकुशी कर ली। बाल्को नगर के एक शैक्षिक संस्थान में उसे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी मिली थी। इसी परिसर में इसे फांसी के फंदे पर लटका पाया गया। लेमरु थाना के चिरईझुंझ के रहने वाले भरत की मौत की खबर होने पर परिजन कोरबा आये। भरत की पत्नी शुभामनी ने बताया कि उसे काफी समय से शराब की आदत थी।

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सरकारी स्कूल में कर्मचारी भर्ती में बड़ी बेटी के विवाह के लिए ₹500000 का लोन लिया था और 400000 रुपए अदा हो चुके थे। पिछले 2 महीने से काम पर नहीं जा रहा था।

सामान्य शिक्षा ग्रहण करने पर भी अच्छे वेतन वाली सरकारी नौकरी मिलने का किस तरह से मजाक उड़ाया जा रहा है यह इस घटना से साफ हो गया है। हालांकि नियमों के अंतर्गत सरकार इस मामले में मृतक के एक आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ प्रदान करेगी ताकि परिवार के सदस्यों का जीवन यापन बेहतर तरीके से चलता रहे। इन सबके बावजूद अहम सवाल कायम है कि आखिरकार जीवन स्तर की चिंता करने वाला वर्ग अपने आप को शराब के चंगुल से मुक्त क्यों नहीं कर पा रहा है

झटपट न्यूज