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मुश्किल में डाल रखी है हाथियों ने लोगों की जिंदगी. किसानों की फसल और संपत्ति को लगातार नुकसान पहुंचाने का सिलसिला जारी….

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कोरबा . कोरबा और कटघोरा वनमंडलों में हाथियों की लगातार बढ़ती गतिविधियों ने एक बार फिर ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। दोनों क्षेत्रों में सौ से ज़्यादा हाथियों के सक्रिय होने से लोगों में दहशत का माहौल है। फसल कटाई का समय है और किसान असमंजस में हैं—अपनी फसल बचाएं या अपनी जान। अब तक दोनों वनमंडलों में करीब 60 एकड़ से ज़्यादा फसलें तबाह हो चुकी हैं और कई घरों को भी नुकसान पहुंचा है। हाथियों की बढ़ती मौजूदगी ने ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। आइए, इस रिपोर्ट में देखते हैं कि जमीनी हालात क्या हैं।

कोरबा और कटघोरा वनमंडलों में इस समय हाथियों की भारी गतिविधि देखी जा रही है। कोरबा वनमंडल में 61 हाथियों का दल सक्रिय है, जबकि कटघोरा वनमंडल में 54 हाथियों का बड़ा झुंड घूम रहा है। कटघोरा के पचरा जंगल में हाथियों का यह दल डेरा जमाए हुए है, जिससे आसपास के गांवों में दहशत फैल गई है। फसल कटाई का समय होने के कारण किसान सबसे अधिक प्रभावित हैं। कोरबा वनमंडल में 32 एकड़ और कटघोरा में करीब 30 एकड़ फसलें हाथियों के कारण बर्बाद हो चुकी हैं। कई घर भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। ग्रामीणों के सामने अब दोहरी चुनौती है—रातभर जागकर अपनी सुरक्षा का इंतजाम करें या खेतों में लगी फसल को बचाएं।

क्षेत्र के ग्रामीण और किसान अपने इलाके में हाथियों से संबंधित समस्या को लेकर काफी समय से परेशान है। वे बताते हैं कि किसी प्रकार दिन गुजर जाता है लेकिन शाम होने के साथ रात के घंटे बिताना बहुत मुश्किल काम हो जाता है। चिंता रहती है कि पता नहीं कब हाथी पहुंच जाए और क्या कुछ नुकसान कर जाएं। अगली सुबह का सूरज हम लोग देख भी सकेंगे इसकी गारंटी भी नहीं रहती। एक बात और है कि अगर हम लोग सुरक्षित रह जाते हैं तो हमारे फैसले किस हाल में मिलेंगे और हमारे निवास स्थान इसकी भी चिंता सताते रहती है। ग्रामीणों ने पूरी समस्या को लेकर वन विभाग से किसी प्रकार का सहयोग नहीं मिलने की बात कही

कटघोरा वनमंडल के डीएफओ कुमार निशांत ने बताया कि विभाग लगातार ग्रामीणों को जागरूक कर रहा है और टीमों को निगरानी पर लगाया गया है। हाथियों को सुरक्षित ढंग से जंगल की ओर खदेड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इतने बड़े दल को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण है। वन विभाग ग्रामीणों से अपील कर रहा है कि हाथियों के नज़दीक जाने की कोशिश न करें और विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें।हाथियों की बढ़ती मौजूदगी एक बार फिर मानव–वन्यजीव संघर्ष को उजागर कर रही है। सवाल यह है कि कब तक ग्रामीण इस दहशत में जीने को मजबूर रहेंगे और कब प्रभावी समाधान सामने आएगा। फिलहाल, वन विभाग की कोशिशें जारी हैं, लेकिन राहत कब मिलेगी—यह अभी भी एक बड़ा सवाल है।