एसईसीएल के विभागीय अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर केवल मजाक किया जा रहा है। विभागीय अस्पताल केवल रेफर सेंटर बनकर रह गए है। स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर करोड़ों खर्च करने के बाद स्थिती सुधरने का नाम नहीं ले रही है। अस्पतालों में चिकित्सकों का टोटा बना हुआ है वहां कर्मचारियों की भी कमी बनी हुई है। इस बात का खुलासा उस वक्त हुआ जब कोल इंडिया वेलफेयर बोर्ड का दौरा मुड़ापारा स्थित विभागीय अस्पताल में हुआ।
कोल इंडिया के जिस एसईसीएल कंपनी को नवरत्न कंपनी का दर्जा मिला है वही कंपनी अपने कर्मचारियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। कोल उत्खनन को प्राथमिकता देने वाली कंपनी विभागीय अस्पताल में स्वास्थ्य बढ़ाने को लेकर जरा भी गंभीर नहीं है,जिससे विभागीय कर्मी परेशान है और एसईसीएल को कोस रहे है। फंड के नाम पर करोड़ों रुपए फूंकने के बाद भी व्यवस्था जस की तस बनी हुई है जिससे विभागीय कर्मी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे है। शुक्रवार को कोल इंडिया वेलफेयर बोर्ड का दौरान मुड़ापार स्थित एसईसीएल के मुख्य अस्पताल का दौरा हुआ,जहां किचन से लेकर अन्य सुविधाओं तो सही रही लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मियों का अभाव पाया गया। वेलफेयर बोर्ड के सदस्यों ने कहा,कि उन्हें लंबे समय से विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी होने की शिकायत मिल रही थी। अस्पताल केवल रिफर सेंटर बनकर रह गए थे। निरिक्षण के दौरान सारी हकीकत सामने आ गई,जिस पर बोर्ड की बैठक में विस्तार से चर्चा की जाएगी।
वेलफेयर बोर्ड के सदस्यों ने अस्पताल के हर कोने का दौरा किया और अपनी रिपोर्ट तैयार की। बोर्ड के सदस्यों में सभी प्रमुख श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। चर्चा के दौरान मीडियाकर्मियों ने वेलफेयर बोर्ड के सदस्यों से सवाल यह वाल पूछ लिया,कि विभाग में काम पूरा होने से पहले ही ठेकेदार को भुगतान कर दिया जाता है। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा,कि इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से पूछताछ की जाएगी।
विभागीय कर्मियों की सुविधाओं में विस्तार के लिए समय समय पर वेलफेयर बोर्ड का दौरा होता है। बोर्ड के सदस्य अपनी रिपोर्ट बनाकर कंपनी को प्रेषित तो कर देते हैं लेकिन उसके सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आ पाते। व्यवस्था सुधरे इसके लिए बोर्ड के सदस्यों को कंपनी पर दबाव बनाना होगा,ताकी विभागीय सुविधाओं का लाभ सभी के मिल सके।