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छोटे नोटों का ‘मोटा खेल’! बिलासपुर में 17.90 लाख कैश के साथ युवक गिरफ्तार, MP में खपाने की थी तैयारी

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छोटे नोटों का ‘मोटा खेल’! बिलासपुर में 17.90 लाख कैश के साथ युवक गिरफ्तार, MP में खपाने की थी तैयारी

₹10, ₹20 और ₹50 के नए नोटों की 81 गड्डियां बरामद, कमीशन पर सप्लाई का खुलासा

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में छोटे नोटों के जरिए बड़े कमीशन के खेल का खुलासा हुआ है। बेलगहना रेलवे स्टेशन (टेगनमाड़ा) के पास पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में एक युवक को 17 लाख 90 हजार रुपए नकद के साथ गिरफ्तार किया गया है। आरोपी के पास से ₹10, ₹20 और ₹50 के बिल्कुल नए नोटों की 81 गड्डियां बरामद की गई हैं।पुलिस के मुताबिक, आरोपी इन छोटे नोटों को कमीशन पर सप्लाई करने का काम करता था और इन्हें मध्यप्रदेश में खपाने ले जा रहा था।

सूटकेस और बैग में भरकर ले जा रहा था नोटों की खेपजानकारी के अनुसार, बेलगहना थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम क्षेत्र में पेट्रोलिंग कर रही थी। इसी दौरान एक युवक संदिग्ध हालत में सूटकेस और बैग के साथ मिला। तलाशी लेने पर उसके पास से बड़ी मात्रा में छोटे मूल्य वर्ग के नए नोट बरामद हुए।

नोटों की गड्डियां इतनी व्यवस्थित और नई हालत में थीं कि पुलिस को तुरंत कमीशन आधारित अवैध सप्लाई नेटवर्क की आशंका हुई।

आरोपी की पहचान: बिलासपुर निवासी पवन बजाज

पकड़े गए युवक की पहचान पवन बजाज (35 वर्ष) के रूप में हुई है, जो बिलासपुर शहर के सिटी कोतवाली क्षेत्र स्थित कश्यप कॉलोनी का रहने वाला बताया गया है।प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह पहले तांबा-पीतल स्क्रैप के कारोबार से जुड़ा रहा है। इसी काम के चलते उसका बैंकों में नियमित आना-जाना था।

बैंक संपर्कों के जरिए जुटाए छोटे नए नोट?

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी ने बैंकिंग सिस्टम और बैंक स्टाफ से बने संपर्कों का फायदा उठाकर नए छोटे नोटों की बड़ी मात्रा जुटानी शुरू की। बाद में वह इन्हें कमीशन लेकर सप्लाई करने लगा।

सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि—इतनी बड़ी मात्रा में नए छोटे नोट आरोपी तक पहुंचे कैसे?

इन्हें मध्यप्रदेश में कौन खरीद रहा था?

और आखिर किस मकसद से इनकी इतनी डिमांड थी?

पुलिस की जांच अब खरीदारों और सप्लाई चेन पर केंद्रित

फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले में सप्लाई नेटवर्क, नोटों के स्रोत, और मध्यप्रदेश कनेक्शन की गहराई से जांच कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि यह मामला सिर्फ कमीशन पर छोटे नोट बेचने तक सीमित नहीं, बल्कि इसके पीछे संगठित नेटवर्क भी हो सकता है।