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हार्ट अटैक के बाद सुष्मिता ​​​​​​​बोलीं- दिल को रखें स्ट्रॉन्ग:दौड़ने से दिल मजबूत, दिमाग दुरुस्त; हेल्थ के लिए डाइट भी बदलें

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47 साल की सुष्मिता सेन को हाल ही में हार्ट अटैक आने के बाद एंजियोप्लास्टी से गुजरना पड़ा। सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा, ‘अपने हार्ट को हमेशा खुश और स्ट्रॉन्ग रखें, क्योंकि जब आपको इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होगी तो यही आपके साथ खड़ा होगा।’

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सुष्मिता सेन ने इंस्टाग्राम पर अपने फैंस को दी जानकारी
सुष्मिता सेन ने इंस्टाग्राम पर अपने फैंस को दी जानकारी

स्पोर्ट्स इंजरी एक्सपर्ट और ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अमित अग्रवाल कहते हैं कि रोजाना रनिंग-जॉगिंग और एक्सरसाइज करने वालों का दिल मजबूत होता है। सुष्मिता सेन भी अपनी फिटनेस को लेकर हमेशा सजग रही हैं। यही वजह है कि वह हार्ट अटैक से उबरकर फिर उसी जिंदादिली के साथ फैंस के सामने हैं।

आज ‘फुरसत का रविवार’ है और आप भी जरूर जॉगिंग-वॉकिंग करने के बाद तरोताजा फील कर रहे होंगे। या आप कई दिनों से खुद को फिट रखने के लिए जॉगिंग के बारे में सोच रहे होंगे कि आज नहीं, कल से वॉक पर जाएंगे। तो कल क्यों, आप आज ही हमारे साथ ‘जॉगिंग’ पर चलिए।

अब मिलते हैं दिल्ली के मैराथन रनर और फिटनेस फ्रीक 70 साल के ‘जवान’ सतीश सक्सेना से। उनकी कहानी, उनकी जुबानी…

’55 साल की उम्र में 6 बीमारियां थीं, लेकिन, अब 70 का होने वाला हूं और जॉगिंग की बदौलत मैंने इन बीमारियों को दूर भगा दिया। बिना डॉक्टर और दवाओं के मेरी लाइफ अब फिट है।’

सतीश सक्सेना बताते हैं-60 साल की उम्र में PWD से रिटायर हुआ, तब कई बीमारियां घेर चुकी थीं। ब्लड प्रेशर-कोलेस्ट्रॉल की चपेट में आकर डायबिटीज बॉर्डर लाइन पर थी। मोटापे से अलग परेशान था। रिटायरमेंट वाले दिन पहली बार मेरा ध्यान खुद पर गया।

मेरी यह हालत देख बहू ने हाफ मैराथन के लिए मेरा फॉर्म भर दिया। मैंने कहा-मैं कभी 100 मीटर भी नहीं दौड़ा, सीढ़ियां चढ़ते हांफ जाता हूं। मैराथन कैसे करूंगा। लेकिन, बहू नहीं मानी। अब मुझे साढ़े 3 महीने बाद 21 किमी दौड़ना था।

अगले दिन से मैंने टहलना शुरू किया। परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के बीच ऐलान कर दिया कि 3 महीने बाद हाफ मैराथन दौड़कर पूरी करूंगा। सबने मेरा मजाक उड़ाया गया।

15 दिन के अंदर ही सुबह-शाम 2 टाइम वॉक और आखिर में थोड़ा सा दौड़ने लगा। डेढ़ महीने में ही रोज 10 किमी और हफ्ते में एक दिन 12 किमी तक बिना रुके वॉकिंग और रनिंग करता।

आखिर में वह दिन भी आया जब गुरुग्राम जाकर 3 घंटे के कटऑफ टाइम से ठीक 2 मिनट पहले हाफ मैराथन पूरी कर ली। उस दिन से खुद पर भरोसा हो गया। मैंने तय कर लिया कि खुद को बदलना है। डाइट बदली और रोज दौड़ने लगा। मेरा पर्सनल बेस्ट रिकॉर्ड 2 घंटे 16 मिनट 31 सेकंड में हाफ मैराथन दौड़ने का है। तबसे मैं 10 हजार किमी से ज्यादा दौड़ चुका हूं।

दौड़ के बाद बदला खानपान, तेल-मसाला, दूध-चीनी सब बंद

दौड़ना शुरू करने के साथ ही तेल-मसाला, दूध-चीनी सब छोड़ दिया। सुबह सिर्फ एक बार नाश्ता करता हूं। दोपहर बाद दाल, चावल, सब्जी, रोटी खाता हूं। शाम को 7 बजे ग्रीन टी के साथ कुछ हल्का हेल्दी नाश्ता करता हूं।

सिर्फ सादा खाना खाकर रनिंग के बूते 60 साल की उम्र के बाद अपना कायाकल्प करने वाले सतीश सक्सेना का दावा झूठा नहीं है। उनकी बातों को साइंस भी मानता है और तमाम रिसर्च में रनिंग के फायदे सामने आए हैं।

जॉगिंग-रनिंग के कितने फायदे?

डॉ. अमित अग्रवाल बताते हैं कि रनिंग-जॉगिंग के बहुत फायदे हैं। इससे शुगर, बीपी और वजन कंट्रोल में रहता है। बॉडी में गुड हॉर्मोंस रिलीज होते हैं। कई गंभीर बीमारियों से बचाव होता है।

टहलने-दाैड़ने के 10 कौन से फायदे हैं, ये जानते हैं…

1- दौड़ने से दिल होता है मजबूत

अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी की रिसर्च भी यही बताती है कि रोज सिर्फ 5-10 मिनट दौड़ लें, टहल लें, तो उतने भर से ही दिल के रोगों सहित दूसरी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। जॉगिंग से दिल की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। रनिंग से वजन कंट्रोल में रहता है, तो दिल को भी इसका बोझ नहीं झेलना पड़ता। ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल लेवल नॉर्मल रहता है। दिल के रोगों का खतरा 35 से 55 फीसदी तक कम हो जाता है।

2- उम्र लंबी होती है, दुरुस्त रहता है दिमाग और आंखें

जर्नल आर्काइव्स ऑफ इंटर्नल मेडिसिन की एक रिपोर्ट के मुताबिक रोज दौड़ने वाले ज्यादा लंबा जीते हैं। कैंसर, डायबिटीज, हाई ब्ल्ड प्रेशर, ईटिंग डिसऑर्डर का रिस्क कम हो जाता है।

टहलने और दौड़ने से दिमाग और आंखें स्वस्थ हो जाती हैं। रोज 8 किमी तक दौड़ने या टहलने वालों में आंखों से जुड़ी समस्याएं होने का खतरा 41 फीसदी तक कम होता है।

3- रनिंग में वेटलिफ्टिंग से 3 गुना कैलोरी बर्न होती है

लोग वजन कम करने के लिए साइकलिंग, स्विमिंग से लेकर डांस तक करते हैं। जिम जाते हैं। लेकिन, दौड़ते वक्त ऐसी एक्टिविटीज से कहीं ज्यादा कैलोरीज बर्न होती है। यानी मोटापे से बचने का सबसे आसान तरीका है- दम भर दौड़िए।

4-जवानी की जॉगिंग बुढ़ापे में गिरने से बचाएगी

अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के जर्नल के मुताबिक जो लोग अपनी जवानी के दिनों से टहलने, दौड़ने जा रहे हैं, बुढ़ापे में भी वे फुर्तीले बने रहते हैं। चलने-फिरने में उन्हें कोई मुश्किल नहीं होती। पैरों की मसल्स मजबूत होती हैं, जिससे गिरने की आशंका कम होती है।

5- घुटनों में दर्द है तो शुरू करें वॉकिंग-जॉगिंग

आमतौर पर माना जाता है कि दौड़ने से घुटने खराब होते हैं। लेकिन, अमेरिका के यूटा स्थिग ब्रिगम यंग यूनिवर्सिटी की रिसर्च बताती हैं कि दौड़ने जैसी एक्सरसाइज से टिश्यूज मजबूत होते हैं और घुटने हेल्दी रहते हैं। जॉगिंग करने से घुटनों का दर्द भी कम हो जाता है। लेकिन, इस बात का ख्याल रखें कि इस दौरान घुटनों पर उतना ही जोर डालें, जितना आप सहन कर सकें।

6- 30 मिनट दौड़िए-सर्दी-जुकाम से मुक्त रहिए

‘द ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन’ बताती है कि अगर सर्दी-जुकाम है, तो 30 मिनट तक दौड़ लीजिए, जिससे इम्यून सिस्टम एक्टिव हो जाएगा और आपको कोल्ड से बचा लेगा। रनिंग करने वालों को सांस और फेफड़ों से जुड़े गंभीर संक्रमण का खतरा 43 फीसदी तक कम होता है।

7- दूर होती है विटामिन डी की कमी

विटामिन डी की कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसे रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है। लेकिन, जॉगिंग के दौरान सूर्य की रोशनी से शरीर को पर्याप्त विटामिन डी मिल जाता है, जिससे इन बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है।

8- बढ़िया रहता है मूड, तनाव-डिप्रेशन भागते हैं दूर

तनाव और डिप्रेशन से जूझ रहे लोगों के लिए रोज सुबह शांत मन से टहलना फायदेमंद साबित होगा। यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन अपनी स्टडी में साबित कर चुकी है। जब हम दौड़ते हैं तो शरीर में नॉर-एपिनेफ्रन नाम के केमिकल की मात्रा बढ़ जाती है। यह केमिकल स्ट्रेस से लड़ने में शरीर की मदद करता है।

9- मेनोपॉज के बाद टहलने से अच्छी नींद आती है

मोनोपॉज के बाद अक्सर सोते समय महिलाओं के शरीर का तापमान अचानक बढ़ जाता है, पसीना आने लगता है। उनकी नींद नहीं पूरी हो पाती। फ्रेड हचिंसन कैंसर रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट बताती है कि रोजाना वाॅक पर जाने वाली महिलाओं को इन समस्याओं से निजात मिल जाती है।

10- खुद से हो जाता है प्यार, सातवें आसमान पर पहुंच जाता है आत्मविश्वास

टहलना, दौड़ना एक्सरसाइज कम खेल ज्यादा है। अच्छे जूते पहनिए और लक्ष्य तय करिए। सुबह-सुबह लक्ष्य पूरा करने से आत्मविश्वास बढ़ेगा, खुद की नजरों में आपकी इज्जत बढ़ेगी।

दौड़ने-भागने की 4 कैटिगरी

जॉगिंग और रनिंग एरोबिक एक्सरसाइज हैं। एरोबिक का अर्थ है ऑक्सीजन के साथ। यानी ऐसी फिजिकल एक्टिविटी जो ब्ल्ड ग्लूकोज या बॉडी फैट और ऑक्सीजन के साथ एनर्जी पैदा करे। चलने-फिरने वाली इस एक्सरसाइज की 4 कैटिगरी हैं:

कितनी देर करें जॉगिंग और रनिंग

रोज 30 मिनट तक जॉगिंग या रनिंग कर सकते हैं। 35 से 40 की उम्र में अगर दौड़ना शुरू कर रहे हैं, तब वॉकिंग और जॉगिंग से शुरुआत करें। 50 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों के लिए 1 घंटे से 45 मिनट में 4-6 किमी टहलना पर्याप्त है।

जिन्हें पहले से अनुभव नहीं है, उन्हें सिर्फ वॉकिंग और जॉगिंग करनी चाहिए। स्प्रिंटिंग खिलाड़ियों के लिए है।

मेनोपॉज के बाद बॉडी कमजोर हो जाती है। महिलाओं को ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याएं ज्यादा होती हैं। इसलिए उनके लिए भी दौड़ने की जगह टहलना काफी है। प्रेग्नेंसी के दौरान 1 घंटे में 3 से 4 किमी तक वॉक करें और ब्रिस्क वॉक, जॉगिंग या रनिंग बिल्कुल न आजमाएं।

आखिर में हिटलर का गुरुर तोड़ने वाले जेसी ओवेंस के बारे में भी जानें

अमेरिका के जेसी ओवेंस की गिनती दुनिया के सबसे उम्दा एथलीट्स में होती है। 1936 के ओलिंपिक गेम्स में जेसी ने रनिंग और लॉन्ग जंप में 4 गोल्ड मेडल जीतकर रिकॉर्ड बनाया, जो 48 साल तक नहीं टूट सका। वह 45 मिनट के अंदर 2 खेलों की 4 कैटिगरी में खेले और चारों में इतिहास रच दिया। उनकी यह सफलता देखकर हिटलर भी बौखला गया था।

लेकिन, यह चुस्त-दुरुस्त खिलाड़ी लंबी जिंदगी नहीं जी सका और 66 साल की उम्र में जान चली गई। मौत की वजह थी फेफड़ों का कैंसर। जेसी ओवेंस चेन स्मोकर थे और लगातार सिगरेट पीते रहते थे। जिससे उनके फेफड़ों ने जवाब दे दिया।

इसलिए, सिर्फ एक्सरसाइज ही काफी नहीं है, लंबी और खुशहाल जिंदगी जीनी है तो खानपान और लाइफस्टाइल भी बदलिए। अगर किसी तरह का कोई हेल्थ इश्यू है तो कोई भी एक्सरसाइज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर और एक्सपर्ट से सेफ्टी टिप्स जरूर ले लें।

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