Acn18. Com.आश्विन यानी क्वांर मास में खान-पान और दिनचर्या को लेकर आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने जरूरी सलाह दी है। उनका कहना है कि इस मौसम में पित्त दोष बढ़ने से त्वचा और पित्त संबंधी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है।
डॉ. शर्मा के मुताबिक, क्वांर मास में पित्त शामक और हल्के आहार को प्राथमिकता देनी चाहिए। खास तौर पर गुड़, जौ, ज्वार, चावल, मूंग, मसूर और मौसमी फलों का सेवन हितकारी बताया गया है।
वहीं, करेले से परहेज करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा उड़द और कुलथी दाल, बैंगन, मूली, फूलगोभी, पत्तागोभी, पालक और ज्यादा तेल-मिर्च वाले भारी या बासी भोजन से भी बचने को कहा गया है।
आयुर्वेद चिकित्सक ने इस दौरान धूप में अधिक रहने, दिन में सोने और ओवरईटिंग से बचने, शरीर को ढककर रखने और हल्के गुनगुने पानी से स्नान करने की सलाह दी है।
उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोककहावत “क्वांर करेला, कार्तिक मही” का उल्लेख करते हुए मौसम के अनुसार खान-पान रखने की परंपरा पर जोर दिया।





