Acn18. Com.कोरबा के छोटे से गांव केराकछार की मिट्टी में पली-बढ़ी एक बेटी आज देश के लिए कबड्डी खेल रही है। जिस कमरे में कभी एक साधारण परिवार की बेटी अपने सपने संजोती थी आज वहीं उसके मेडल और सम्मान उसकी कामयाबी की कहानी सुना रहे हैं। ये कहानी है संजू देवी यादव की जिन्होंने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम का हिस्सा बनकर पूरे छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है। उनके इसी कामयाबी से प्रभावित होकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय उनसे फोन पर बात कर बधाई दी है.
ये है कोरबा का गांव केराकछार और यही वो घर है, जहां संजू देवी यादव के सपनों ने उड़ान भरी।

आज बेटी की कामयाबी पर माता-पिता की आंखों में खुशी है और चेहरे पर गर्व। संजू का छोटा सा कमरा भले ही साधारण हो लेकिन यहां रखे मेडल और सम्मान उनकी असाधारण मेहनत की कहानी बयां करते हैं।

संजू के पिता राम जी यादव पेंटिंग का काम करते हैं। मजदूरी और पेंटिंग से परिवार का गुजर-बसर करने वाले पिता ने सीमित संसाधनों के बावजूद बेटी की पढ़ाई और उसके खेल के सपने में कभी कमी नहीं आने दी।
आज भी परिवार गांव में साधारण जिंदगी जी रहा है। घर में पीएम आवास का निर्माण चल रहा है… लेकिन इस साधारण घर की पहचान अब देश की एक कबड्डी खिलाड़ी की कामयाबी से हो चुकी है।
कभी गांव की छोटी-छोटी प्रतियोगिताओं में कबड्डी खेलने वाली संजू ने अपनी मेहनत, जुनून और लगातार संघर्ष के दम पर राष्ट्रीय स्तर तक जगह बनाई… और फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व किया।
2 एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम का हिस्सा बनना संजू के लिए सिर्फ एक उपलब्धि नहीं बल्कि उस परिवार के संघर्ष की जीत है, जिसने बेटी के सपने पर भरोसा किया।
एक छोटे से गांव से निकलकर देश की जर्सी तक का ये सफर संजू ने अपनी मेहनत से तय किया है। आज उनकी सफलता पर परिवार ही नहीं पूरा केराकछार और छत्तीसगढ़ गर्व कर रहा है।





