Acn 18.com कोरबा: छत्तीसगढ़ के भिलाई खुर्द और आसपास के प्रभावित गांवों में 25 सितंबर 2026 को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है।
एसईसीएल मानिकपुर प्रभावित ग्राम भू-विस्थापित समिति, भिलाई खुर्द के बैनर तले ग्रामीणों ने कलेक्टर कोरबा को ज्ञापन सौंपकर वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण की मांग की है।
ग्रामीणों ने साफ कहा कि वे विकास या एसईसीएल परियोजना के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत प्रभावित परिवारों के अधिकारों की अनदेखी करके नहीं चुकाई जा सकती।
ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना के कारण उनकी जमीन, रोजगार, आजीविका और सामाजिक जीवन प्रभावित हुआ है, लेकिन लंबे समय से मुआवजा, रोजगार, पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी मांगें लंबित हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, इससे पहले भी जनसुनवाई की तारीख तय हुई थी, लेकिन लंबित मांगों के समाधान को लेकर प्रभावित ग्रामीणों और भू-विस्थापित संगठन के विरोध के बाद उसे स्थगित करना पड़ा था। अब दोबारा 25 सितंबर को जनसुनवाई प्रस्तावित है।
ग्रामीणों की दो प्रमुख मांगें बेहद अहम हैं।
1963-64 में जिन किसानों की जमीन अर्जित की गई थी और जिन्हें अब तक भूमि के एवज में एसईसीएल में डिस्प्लेसमेंट रोजगार नहीं मिला, उन्हें रोजगार दिया जाए।
साथ ही, जिन प्रभावित किसानों को दशकों बाद भी जमीन का मुआवजा नहीं मिला है, उन्हें तत्काल मुआवजा दिया जाए।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जनसुनवाई से पहले प्रभावित परिवारों के साथ बैठक कर हर मांग पर बिंदुवार चर्चा और समयबद्ध समाधान किया जाए।
अब सवाल यही है—क्या 25 सितंबर की पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले वर्षों से लंबित ग्रामीणों की मांगों का समाधान होगा, या एक बार फिर विरोध के बीच जनसुनवाई कराने की नौबत आएगी?









