महिला उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने निलंबित IPS रतनलाल डांगी से जुड़े प्रकरण पर सख्ती दिखाई है। एक सप्ताह में शपथपत्र के साथ जवाब मांगा।
निलंबित आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ महिला पुलिसकर्मी द्वारा लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की अदालत ने मामले में संबंधित पक्ष को एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
महिला पुलिसकर्मी ने लगाए गंभीर आरोप
हाईकोर्ट में दायर याचिका के अनुसार, बिलासपुर निवासी महिला पुलिसकर्मी वर्तमान में पुलिस विभाग में सब-इंस्पेक्टर के पद पर पदस्थ है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन आईजीपी रतनलाल डांगी ने वीडियो कॉल के जरिए उससे बातचीत शुरू की थी। याचिका में महिला ने आरोप लगाया है कि कुछ समय बाद डांगी की ओर से उसके व्हाट्सऐप नंबर पर अश्लील संदेश भेजे जाने लगे। वीडियो कॉल के दौरान आपत्तिजनक व्यवहार किए जाने और विरोध करने पर धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।
पति को झूठे केस में फंसाने की धमकी का आरोप
शिकायत में महिला पुलिसकर्मी ने आरोप लगाया है कि विरोध करने पर उसे धमकी दी गई कि यदि वह लगातार वीडियो कॉल पर बात नहीं करेगी या मोबाइल बंद करेगी तो उसके पति के खिलाफ झूठा आपराधिक मामला दर्ज कराकर उसे जेल भेज दिया जाएगा। साथ ही पति का नक्सल प्रभावित जिले में तबादला कराने और परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।
DGP से शिकायत के बाद भी कार्रवाई पर उठे सवाल
पीड़िता के मुताबिक, उसने 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस महानिदेशक (DGP), रायपुर के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। इसके बाद मामले की जांच के लिए एक DIG स्तर के अधिकारी और समान रैंक के पुलिस महानिरीक्षक आनंद छाबड़ा को जांचकर्ता अधिकारी बनाया गया। हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच की प्रक्रिया से उसे न्याय नहीं मिला और संबंधित अधिकारियों द्वारा आरोपी आईपीएस अधिकारी को बचाने का प्रयास किया गया।
केंद्र और राज्य के गृह विभाग से भी की शिकायत
महिला ने 20 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार के गृह विभाग और छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग के सचिवों के समक्ष भी शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उसने हाईकोर्ट का रुख किया। पीड़िता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित पक्ष को एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब मामले में अगली सुनवाई के दौरान सरकार और संबंधित अधिकारियों की ओर से प्रस्तुत जवाब के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।








