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छत्तीसगढ़ विधानसभा: 54 साल बाद हाउसिंग बोर्ड के नियमों में बड़ा बदलाव, संशोधन विधेयक पारित

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छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज राज्य के बुनियादी ढांचे और आवास विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। प्रदेश के आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने ‘छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (संशोधन) विधेयक 2026’ सदन में पेश किया, जिसे चर्चा के बाद सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। यह संशोधन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हाउसिंग बोर्ड के नियमों में करीब 54 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कोई बड़ा बदलाव किया गया है।

अब ‘डिमांड’ पर बनेंगे घर : 60% बुकिंग अनिवार्य
संशोधन विधेयक की सबसे बड़ी विशेषता हाउसिंग बोर्ड की कार्यप्रणाली में लाया गया व्यावसायिक अनुशासन है। मंत्री ओपी चौधरी ने सदन को जानकारी दी कि अब बोर्ड बिना किसी ठोस मांग के घर या दुकानों का निर्माण नहीं करेगा।

नया नियम: किसी भी प्रोजेक्ट पर काम तभी शुरू होगा जब उसकी कम से कम 60 फीसदी बुकिंग एडवांस में हो चुकी हो।
उद्देश्य: इस नियम से बोर्ड की उन संपत्तियों के ‘डेड स्टॉक’ बनने का खतरा खत्म हो जाएगा, जो वर्षों से बिना बिके खाली पड़ी रहती थीं। इससे सरकारी धन की बर्बादी रुकेगी।

 

छत्तीसगढ़ से बाहर भी काम कर सकेगा बोर्ड
54 साल पुराने नियमों की बेड़ियों को तोड़ते हुए अब छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड का दायरा राज्य की सीमाओं से बाहर तक फैल गया है। संशोधन के बाद अब बोर्ड दूसरे राज्यों में भी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स** पर काम करने के लिए अधिकृत होगा। इससे बोर्ड को अपनी आय बढ़ाने और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का मौका मिलेगा।

33 में से 27 जिलों में सक्रियता
सदन में चर्चा के दौरान मंत्री ने बोर्ड की वर्तमान स्थिति का ब्यौरा भी पेश किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 33 में से 27 जिलों में हाउसिंग बोर्ड के विभिन्न प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। हमारा लक्ष्य केवल मकान बनाना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना है।”

विपक्ष और सत्ता पक्ष का रुख
जहां सत्ता पक्ष ने इसे हाउसिंग बोर्ड का ‘कायाकल्प’ करने वाला कदम बताया, वहीं जानकारों का मानना है कि 60% प्री-बुकिंग की शर्त से बोर्ड की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और परियोजनाओं में देरी की समस्या कम होगी। 54 साल पुराने नियमों में बदलाव के साथ ही अब हाउसिंग बोर्ड एक आधुनिक और प्रतिस्पर्धी संस्था के रूप में उभरने के लिए तैयार है।

  1. डेड स्टॉक की समस्या
  2. अंतरराज्यीय प्रोजेक्ट्स की योजना
  3. रियल एस्टेट सेक्टर पर प्रभाव