शहीद जवान की मां को मिलेगा पारिवारिक पेंशन, हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग को छह सप्ताह में फैसला करने दिया निर्देश
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक अहम आदेश में शहीद पुलिस जवान की वृद्ध मां को पारिवारिक पेंशन देने का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पिता को दी जा रही पेंशन उनके निधन के बाद मां को मिलनी चाहिए और इस संबंध में राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
नक्सली मुठभेड़ में शहीद हुआ था बेटा
याचिकाकर्ता फिलिसिता लकड़ा, स्वर्गीय लोबिन लकड़ा की पत्नी, जिला जशपुर की निवासी हैं। उनके पुत्र इग्नेशियस लकड़ा छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की 10वीं बटालियन, सूरजपुर में आरक्षक (कांस्टेबल क्रमांक 450) के पद पर पदस्थ थे। 11 दिसंबर 2002 को नक्सली मुठभेड़ में 21 वर्ष की आयु में वे शहीद हो गए थे। अपने पीछे वे पिता, मां, एक भाई और दो बहनों को छोड़ गए थे। शहादत के बाद पिता लोबिन लकड़ा को पारिवारिक पेंशन स्वीकृत हुई थी।
23 अगस्त 2020 को वृद्ध मां ने पेंशन के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। पुलिस विभाग ने यह कहते हुए आवेदन अस्वीकार कर दिया कि वर्ष 1963 और 1965 के नियमों में 1970 के संशोधन के तहत अविवाहित मृत पुलिसकर्मी की मां को पेंशन देने का प्रावधान नहीं है।
कोर्ट ने की ये टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद कहा कि 1965 के नियमों में भी वही प्रावधान लागू माना जाएगा, जो 30 नवंबर 1970 की अधिसूचना के माध्यम से 1963 के नियमों में जोड़ा गया था।
अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिस कर्मचारी ने नक्सली हमले में जान गंवाई हो, उसकी मां को पेंशन से वंचित करना अत्यंत अनुचित है। पिता को जो पेंशन मिल रही थी, उनके निधन के बाद वह मां को हस्तांतरित होनी चाहिए। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता के प्रकरण पर छह सप्ताह के भीतर विचार कर निर्णय ले।




