शराब तस्करी के आरोप में जेल भेजे गए अरुण की बीमार मां की मौत हो गई। गुस्साए वार्डवासियों की मांग पर बेटे को सीएसपी ने पैरोल पर रिहा कर अंतिम संस्कार में शामिल कराया। पूर्व पार्षद ने मुख्य मार्ग पर खुलेआम शराब बिक्री पर सवाल उठाते हुए गोविंदा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जांच की।
कोतवाली थाना क्षेत्र के सीतामणी वार्ड में आबकारी अधिनियम के तहत हुई कार्रवाई के बाद गिरफ्तार किए गए अरुण उर्फ गोविंदा श्रीवास को जेल भेजने के कुछ ही घंटों के भीतर उसकी बीमार मां सावित्री श्रीवास की तबियत बिगड़ गई और उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना से स्थानीय लोगों में आक्रोश है और उन्होंने गोविंदा की अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल पर रिहाई की मांग की।
मंगलवार शाम को अरुण उर्फ गोविंदा को आबकारी अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इसके कुछ ही घंटों बाद, उसकी 45 वर्षीय बीमार मां सावित्री श्रीवास की अचानक तबियत बिगड़ने से मौत हो गई। बुधवार सुबह जब यह खबर फैली, तो बस्तीवासी और वार्ड पार्षद बड़ी संख्या में गोविंदा के घर पहुंचे। उन्होंने गोविंदा को पैरोल पर रिहा कर मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने देने की मांग की। इस मांग को लेकर वार्डवासी एसपी कार्यालय पहुंचे और पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई।
एसपी कार्यालय में लोगों की मांग पर सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोगों को समझाया और गोविंदा को पैरोल पर रिहा कर घर पहुंचाया। अरुण उर्फ गोविंदा अपनी मां की अंतिम यात्रा में शामिल हुआ और मोती सागर स्थित मुक्तिधाम में विधिवत उनका अंतिम संस्कार किया। इस दौरान मुक्तिधाम पर बड़ी संख्या में पुलिस बल भी मौजूद रहा।
इस मामले पर वार्ड के पूर्व पार्षद सुफल दास महंत ने घटना को अत्यंत दुखद बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य मार्ग पर शराब बेची जा रही है, लेकिन थाना प्रभारी इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। उन्होंने गोविंदा के खिलाफ हुई कार्रवाई की भी जांच की मांग की है। मृतक के भाई ने बताया कि गोविंदा उनका बड़ा भाई है और घर का मुख्य सहारा है। पुलिस ने तलाशी के बाद उसे गिरफ्तार किया था। वहीं, मृतक के दोस्त ने बताया कि पुलिस उसे बाइक पर बिठाकर ले गई और कार्रवाई के बाद जेल भेजा, जिसके कुछ घंटे बाद ही उसकी मां की मौत हो गई।
कोरबा सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए गोविंदा को जेल भेजा गया था। परिजनों की पैरोल की मांग पर उन्हें जेल से रिहा कर मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दी गई। उन्होंने यह भी बताया कि सीतामणी में कुछ दिनों पहले चाकूबाजी की घटना के बाद, पुलिस नशे की प्रवृत्ति को कम करने के उद्देश्य से उक्त दिन तीन लोगों के खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई कर उन्हें जेल भेजा था।




